हस्तिनापुर(मेरठ)। ऐतिहासिक नगरी स्थित तीर्थधाम चिदायतन पर चल रही राष्ट्रीय जैन दर्शन विद्वत संगोष्ठी का रविवार को चौथे दिन समापन हो गया। समापन कार्यक्रम में सौ से अधिक लोगों ने भाग लिया। अंतिम दिन विद्वानों ने पंच रामायण की सार्थकता पर विशेष प्रवचन किए। गोष्ठी में 50 विद्वानों ने जैन धर्म संस्कृति के विविध आयाम पर 06 सत्रों में आमंत्रित व्याख्यान दिए। अहिंसा और संयम के साथ शाकाहारी जीवनशैली पर भी वक्ताओं ने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम श्री दिगंबर जैन दिव्या देशना ट्रस्ट दिल्ली-उत्तर प्रदेश, जैन विद्या शोध संस्थान लखनऊ के तत्वावधान और अखिल भारतीय जैन युवा फेडरेशन उस्मानपुर दिल्ली एवं मेरठ द्वारा आयोजित किया जा रहा था। समापन कार्यक्रम के प्रथम सत्र के मुख्य अतिथि रमेश चंद भंडारी रहे। संचालन अमन जैन ने किया। द्वितीय सत्र में सुरेश पाटली मुख्य अतिथि रहे, जबकि संचालन पं. जिनेश जैन ने किया। अनुभव जैन ने मंगलाचरण किया। डॉ. ब्र. सुजाता ने कर्म सिद्धांत के बारे में बताया। कर्म सिद्धांत के भीतर जितना गहरा प्रवेश जैन दर्शन को प्राप्त है, वह अन्य किसी दर्शन में नहीं है। पं. अच्युतकांत शास्त्री जयपुर ने कर्मों के अस्तित्व के बारे में बताया। कर्म का अर्थ है कृत्य, कार्य और क्रिया। भारतीय दर्शनों में कर्मों के स्वरूप व भेद का विस्तृत विवरण किया गया है। पं. अमन जैन शास्त्री ने बताया कि संपूर्ण विश्व में समस्त धर्मों, दर्शनों, साहित्यों, विद्वानों ने कर्म के महत्व की व्याख्या की है। सभी दर्शनों व विद्वानों ने पुनर्जन्म के सिद्धांत को स्वीकारा है। अंत में राकेश जैन शास्त्री, अमित प्रसाद जैन, सौरभ जैन ने सभी का सम्मान किया।
मोक्ष प्राप्ति में बताया पुरुषार्थ का महत्व
विद्वानों ने जैन दर्शन में कर्म मीमांसा पर विचार रखे। जैन शोध संस्थान लखनऊ के उपाध्यक्ष प्रो. डा. अभय कुमार जैन, निदेशक प्रो. राकेश कुमार जैन उपस्थित रहे। प्रथम सत्र में मंच का उद्घाटन योगेश जैन ने किया। पं. संजीव जैन ने मंगलाचरण किया। पं. अभय जैन शास्त्री, पं. डॉ. प्रमोद जैन शास्त्री, पं. सुनील जैन शास्त्री, पं. अरविंद जैन, पं. जिनेश आर सेठ शास्त्री ने विभिन्न विषयों पर विचार रखे। डॉ. प्रमोद जैन शास्त्री ने कहा कि सभी भारतीय दर्शन व बौद्धिक दर्शन में द्रव्य के कार्य का कर्ता ईश्वर है। जैन दर्शन के अनुसार ईश्वर या अन्य कोई निमित्त कार्य का वास्तविक कारण नहीं है। पं. सुनील शास्त्री ने मोक्ष प्राप्ति में पुरुषार्थ के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि मंदबुद्धि जीव भी प्रयोजन की पूर्ति के लिए प्रवृत्तिशील होता है। आत्मा द्वारा मुक्ति के लिए किया जाने वाला उधम ही पुरुषार्थ है। पं. जिनेश आर सेठ ने भारतीय विज्ञान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कर्म, निमित्त, उपादना के बारे में चर्चा की।
जिनेंद्र भगवान का अभिषेक किया
मीडिया प्रवक्ता अरुण जैन एडवोकेट ने बताया कि सुबह सात बजे जिनेंद्र का अभिषेक हुआ। पूजन-विधान के बाद स्वल्पाहार, सीडी, गुरुदेव श्री के प्रवचन हुए। नौ बजे गोष्ठी सत्र, एक बजे प्रवचन और शाम 6 बजे जिनेंद्र भक्ति हुई। चर्चा सत्र के बाद कार्यक्रम का समापन हो गया। इस मौके पर अजित प्रसाद जैन, स्वप्निल जैन, मुकेश जैन, सौरभ जैन, अनिल जैन आदि मौजूद रहे।