मेरठ। बेटियों की पढ़ाई छात्रवृत्ति की मोहताज हो गई है। कोरोना के चलते पिछले आठ माह से कॉलेजों में ऑफलाइन कक्षाएं नहीं हुई हैं। छात्राएं कॉलेज नहीं गई तो अभिभावकों ने बेटी की पढ़ाई से हाथ खींच लिए हैं। उनका कहना है कि पता नहीं छात्रवृत्ति मिलेगी या नहीं, ऐसे में अगले साल ही पढ़ाई कराएंगे। कोरोना के चलते महिला डिग्री कॉलेजों में छात्राओं का ड्रॉपआउट बढ़ा है।
कोरोना का असर छात्राओं की शिक्षा पर हो रहा है। डिग्री कॉलेजों में इन दिनों प्रवेश प्रक्रियाएं चल रही है। द्वितीय एवं अंतिम वर्ष में प्रवेश लेने वाली छात्राओं की संख्या में 15 फीसद की गिरावट आई है। पिछले साल जिन छात्राओं ने प्रवेश लिया था उसमें से काफी ने इस बार द्वितीय एवं अंतिम वर्ष में प्रवेश नहीं लिया है।
द्वितीय वर्ष पर सर्वाधिक असर
छात्राओं का ड्रॉप आउट स्नातक के दूसरे साल की पढ़ाई पर अधिक आया है। शिक्षिकाओं के अनुसार फाइनल में तो अक्सर छात्राओं की संख्या घट जाती है। कई पढ़ाई छोड़ देती हैं, किसी की शादी हो जाती है। माता-पिता पढ़ने की आज्ञा नहीं देते हैं। इस बार दूसरे साल में कम छात्राएं ही प्रवेश ले रही हैं।
कॉलेज ले रहे फीडबैक
कॉलेजों में शिक्षिकाएं स्वयं छात्राओं को फोन करके द्वितीय वर्ष में प्रवेश लेने के लिए कह रही हैं। इस पर छात्राओं और अभिभावकों का कहना है कि कक्षाएं नहीं लग रही हैं। इसलिए अगले साल ही प्रवेश कराएंगे। उनका कहना है पता नहीं छात्रवृृत्ति मिलेगी या नहीं, ऐसे में फीस कहां से आएगी।
वर्जन
कोरोना संक्रमण बड़ी वजह
अमूमन अंतिम वर्ष में छात्राओं की संख्या घटती है। इस बार द्वितीय वर्ष में भी प्रवेश प्रतिशत कम है। अभिभावक प्रवेश नहीं दिला रहे हैं।-डॉ. अमिता शर्मा, प्रेस प्रवक्ता, आरजी पीजी कॉलेज
हर स्तर पर छात्राएं प्रभावित
कोरोना के चलते छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित हुई है। अभिभावक ऑनलाइन पढ़ाई नहीं करा रहे हैं, अब प्रवेश में भी समस्या आ रही है। इससे पढ़ाई छूट रही है।-डॉ. ममता शर्मा, शिक्षिका इस्माईल कॉलेज