इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलॉजिकल साइंस के सचिव आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि एक पौराणिक कथा है जो समुद्र मंथन से जुड़ी है। जब मंथन से हलाहल विष निकला तो भगवान शिव ने उसे पी लिया और अपने कंठ में रोक लिया। इससे उनका शरीर अत्यधिक गर्म हो गया और सृष्टि में संकट आ गया। तब सभी देवताओं ने उन्हें ठंडा करने के लिए उन पर जल अर्पित किया, तभी से शिव भक्त सावन में जल चढ़ाते हैं।
हर सोमवार का अपना महत्व
ज्योतिषाचार्य मनीष स्वामी ने बताया कि श्रावण का पहला सोमवार आयुष्मान योग गणेश चतुर्थी से युक्त होगा। द्वितीय सोमवार सर्वार्थ सिद्धि योग और एकादशी से युक्त होगा। तृतीय सोमवार बुधादित्य योग में होगा। चतुर्थ सोमवार में सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। साथ ही ब्रह्मा ऐंद्र योग है, जो शिव भक्तों के मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए अच्छा है।
यह योग सभी कार्यों को सिद्ध करने की क्षमता रखता है। मान्यता है कि जो भी सावन के सोमवार को भोलेनाथ की श्रद्धा से पूजा करता है, उसे मनचाहा वर या वधू प्राप्त होती है।
अकाल मृत्यु से भी बचाती है शिव अराधना
श्रावण मास में अकाल मृत्यु से बचने, दीर्घायु की प्राप्ति और सभी व्याधियों को दूर करने के लिए भी विशेष पूजा की जाती है। ज्योतिषाचार्य विनोद त्यागी ने बताया कि मार्कण्डेय जी ने लंबी आयु के लिए श्रावण माह में ही घोर तप कर शिव की कृपा प्राप्त की थी। इससे मिली शक्तियों के सामने मृत्यु के देवता यमराज भी नतमस्तक हो गए। सावन का महीना शिव स्तुति के लिए सर्वोत्तम है।