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सत्यप्रकाश अग्रवाल ने तोड़ा उम्र का बंधन, सिवाल में अटका रालोद

Mon, 23 Jan 2017 10:35 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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भाजपा की हॉट सीट मेरठ कैंट पर टिकट की बाजी एक बार फिर सत्यप्रकाश अग्रवाल के हाथ लगी है। वह लगातार चौथी बार यहां से ताल ठोकेंगे। इसके साथ ही अधिक उम्र का हवाला देकर इस सीट से ताल ठोक रहे दावेदारों पर भी सत्यप्रकाश भारी साबित हुए हैं। उधर, सपा-कांग्रेस के गठबंधन पर मुहर लगी तो दक्षिण और कैंट सीट कांग्रेस के खाते में चली गई। कांग्रेस ने कैंट से रमेश धींगड़ा और दक्षिण से आजाद सैफी को प्रत्याशी बनाया है। रालोद में भी सिवालखास को लेकर दिग्गजों के बीच घमासान चल रहा है। हालांकि, रालोद ने पांच सीटों पर अपने प्रत्याशी उतार दिए हैं।
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कैंट सीट को लेकर भाजपा में खूब कयासों का दौर चला। कई दिनों के मंथन के बाद पार्टी ने रविवार को लगातार तीन बार से विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल पर भरोसा जताते हुए उन्हें प्रत्याशी घोषित किया। उधर, कांग्रेस और सपा के गठबंधन पर भी सभी की निगाहें जमीं थीं। गठबंधन होगा या नहीं, इसे लेकर तमाम सियासी आंकलन चल रहे थे। इस बीच, शुक्रवार को दक्षिण से आदिल चौधरी और कैंट सीट से परविंदर सिंह ईशु को प्रत्याशी घोषित किया तो लगा कि गठबंधन की संभावनाएं लगभग खत्म हो गई हैं। यहां तक कि आदिल को सिंबल भी दे दिया गया। हालांकि, सपाइयों ने नामांकन नहीं किया, जिससे माना जा रहा था कि गठबंधन की संभावनाएं अब भी हैं। रविवार को गठबंधन के बाद दोनों सीटों पर कांग्रेस ने अपने प्रत्याशी घोषित किए। दक्षिण से कांग्रेस ने आजाद सैफी को तो कैंट से रमेश धींगड़ा को फिर से चुनावी मैदान में उतारा है। आजाद सैफी गाजियाबाद के रहने वाले हैं।

आखिर भारी पड़े सत्यप्रकाश अग्रवाल
77 साल के सत्यप्रकाश अग्रवाल वर्ष-2002 से लगातार विधायक निर्वाचित होते आ रहे हैं। इस बार पार्टी ने घोषणा की थी कि 75 वर्ष की आयु पार कर चुके नेताओं को टिकट नहीं दिया जाएगा। इसके बाद सत्यप्रकाश को लेकर संशय था। ऐसे में कैंट से वैश्य बिरादरी से पूर्व विधायक अमित अग्रवाल, मुकेश सिंघल, जयकरण गुप्ता, पवन मित्तल, विनीत अग्रवाल शारदा, अजय गुप्ता के अलावा संजीव जैन सिक्का भी दावेदारी जता रहे थे। वहीं, पंजाबी बिरादरी से महापौर हरिकांत अहलूवालिया और राजीव दीवान ताल ठोक रहे थे।
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पीछे रह गई दावेदारों की लंबी फौज
पूर्व विधायक अमित अग्रवाल, प्रदेश संगठन महामंत्री सुनील बंसल, मुकेश सिंघल और संजीव जैन सिक्का संघ के दो नेताओं का खास होने के नाते मैदान में थे, तो अजय गुप्ता की पैरवी सांसद राजेंद्र अग्रवाल कर रहे थे। बाकी दावेदार अपने दम पर लगातार नेताओं और संघ में पैरवी कर रहे थे। इनमें सत्यप्रकाश भी केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह की मजबूत पैरवी के चलते उम्र की बाधा के बावजूद जमे थे। दावेदारों की लंबी फौज के बीच कैंट जैसी मजबूत सीट पर भाजपा में गुटबाजी उभर आई थी। लेकिन, सत्यप्रकाश पार्टी नेताओं का भरोसा जीतने में सफल रहे। हालांकि, असल चुनौती यह है कि 2002 से 2012 के बीच भाजपा का ग्राफ यहां लगातार गिरा है। इस बार टिकट पाने में असफल रहे अमित अग्रवाल ने वर्ष-1996 में करीब 40 हजार से ज्यादा मतों से यह सीट जीती थी।

सिवाल पर रालोद में भी लंबी लाइन
मेरठ। छपरौली के बाद रालोद का गढ़ मानी जाने वाली मेरठ की सिवालखास सीट पार्टी हाईकमान के गले की हड्डी बन गई है। 61 प्रत्याशियों की तीन सूचियां जारी करने के बाद भी पार्टी सिवालखास से प्रत्याशी तय नहीं कर पाई है। इसे लेकर दावेदारों के समर्थकों ने दिल्ली में डेरा जमा रखा है। वर्षों तक सुरक्षित सीट रहने के बाद 2012 के विधानसभा चुनावों में सिवालखास सीट सामान्य हुई थी। जाट मतदाताओं की अच्छी संख्या होने के चलते यह रालोद की परंपरागत सीट मानी जाती है। सामान्य होने के बाद पिछले चुनाव में पार्टी ने जिलाध्यक्ष यशवीर सिंह को टिकट दिया था। भाजपा ने रालोद के टिकट पर बरनावा विधानसभा सीट से दो बार विधायक रहे समरपाल सिंह को और बसपा ने रालोद से दो बार एमएलसी रहे जगत सिंह को टिकट दिया था। तीन जाट नेताओं की लड़ाई में सपा के गुलाम मोहम्मद ने जीत हासिल की थी। मामूली अंतर से हारी सीट पर इस बार भी दावेदारों की लंबी लाइन है। पार्टी हाईकमान अब तक भी इस सीट पर प्रत्याशी घोषित नहीं कर सका है। टिकट की लाइन में पिछली बार हारे यशवीर सिंह, डॉ. राजकुमार सांगवान, जगत सिंह, सुनील रोहटा, रणवीर दहिया समेत एक दर्जन नेता हैं। दावेदारों ने अपनी-अपनी जीत के आंकड़े दिखाते हुए हाईकमान से टिकट मांग रखा है। वहीं, कुछ दावेदारों का तर्क है कि भाजपा ने स्थानीय जाट को उतारा है तो रालोद को भी स्थानीय दावेदार उतारना चाहिए। माना जा रहा है कि स्थानीय और दूसरे प्रत्याशी की जद्दोजहद में ही टिकट अटका है।

उम्मीद के मुताबिक कांग्रेस को मिलीं दो सीटें
सपा-कांग्रेस गठबंधन में कांग्रेस के खाते में कैंट और दक्षिण सीट आने की बात कही जा रही थी। पिछले चुनाव के आधार पर कैंट पर कांग्रेस का दावा था तो दक्षिण पर सपा का। सपा ने टिकट की घोषणा के बाद दक्षिण से आदिल चौधरी को सिंबल दे दिया था लेकिन कैंट से परविंदर ईशु को रुकने को कहा था। सपा में चले घमासान के दौरान अखिलेश यादव ने जब सूची जारी की थी तो उसमें भी कैंट और दक्षिण को खाली छोड़ दिया गया था। कांग्रेस से गठबंधन की चर्चाओं के बीच ईशु और आदिल चौधरी को प्रत्याशी बनाया गया था।

कौन हैं आजाद सैफी
कांग्रेस से आजाद सैफी के टिकट की घोषणा होते ही उनके बारे में चर्चाओं का दौर चल पड़ा। आजाद का परविार मूल रूप से जानी क्षेत्र के गांव भंवी का रहने वाला है। ऑटोमोबाइल और आयुर्वेद दवाओं का व्यापार करने वाले सैफी एनएसयूआई में भी रहे हैं। गाजियाबाद में वर्ष-2000 में कांग्रेस के टिकट पर पार्षद भी चुने गए। उन्होंने हाल ही कांग्रेस ज्वाइन की है। इससे पहले वह एआईएमआईएम के पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष थे।

मेरठ की सीटों पर अब यह हैं हालात
मेरठ शहर विधानसभा
पार्टी        प्रत्याशी
भाजपा   डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी
सपा      रफीक अंसारी
बसपा    पंकज जौली

दक्षिण
पार्टी        प्रत्याशी                 
भाजपा   सोमेंद्र तोमर  
कांग्रेस   आजाद सैफी
बसपा    याकूब कुरैशी
रालोद    पप्पू गुर्जर

कैंट
पार्टी        प्रत्याशी                 
भाजपा  सत्यप्रकाश अग्रवाल   
कांग्रेस   रमेश धींगड़ा
बसपा   सतेंद्र सोलंकी
रालोद   संजीव धामा

किठौर
पार्टी        प्रत्याशी                 
भाजपा   सत्यवीर त्यागी
सपा       शाहिद मंजूर
बसपा     गजराज नागर
रालोद     मतलूब गौड़

हस्तिनापुर
पार्टी      प्रत्याशी
भाजपा   दिनेश खटीक
सपा      प्रभुदयाल वाल्मीकि
बसपा    योगेश वर्मा
रालोद    कुसुम प्रधान

सरधना
पार्टी       प्रत्याशी                 
भाजपा   संगीत सोम
सपा      अतुल प्रधान
बसपा    इमरान कुरैशी
रालोद    वकील चौधरी

सिवालखास
पार्टी       प्रत्याशी
भाजपा     जितेंद्र सतवाई
सपा       गुलाम मोहम्मद
बसपा    नदीम चौहान

हाईकमान के भरोसे का आभार
भाजपा ने चौथी बार विश्वास जताया है। मैं सभी वरिष्ठ नेताओं का आभार व्यक्त करता हूं। क्षेत्र की जनता के भरोसे के कारण ही पार्टी ने चौथी बार मौका दिया है। प्रदेश में भाजपा की सरकार बनेगी।
सत्यप्रकाश अग्रवाल, विधायक कैंट

गठबंधन का लाभ मिलेगा
पिछली बार कई सजातीय उम्मीदवार होने के बाद भी अच्छे वोट मिले थे। इस बार गठबंधन के प्रत्याशी होने का लाभ मिलेगा। कैंट में इस बार सबसे अलग नतीजे आएंगे। - रमेश धींगड़ा, कांग्रेस प्रत्याशी कैंट

मिलकर लड़ेंगे चुनाव
पार्टी के आदेश पर गठबंधन के तहत दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चुनाव लड़ा जाएगा। सभी को पूरा सम्मान देकर इस बार दक्षिण सीट से चुनाव जीता जाएगा।
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- आजाद सैफी, कांग्रेस प्रत्याशी दक्षिण
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