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सत्ता के संरक्षण में चल रहीं नकली रोडवेज बसें  

Fri, 04 May 2018 01:35 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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शहर के सभी चौराहों पर पुलिस होने, रूट पर थाने होने और आरटीओ के पास प्रवर्तन कर्मचारियों की पूरी टीम होने के बावजूद भी सड़कों पर रोडवेज की नकली बसें (डग्गामार बसें) बेलगाम दौड़ रही है। सपा सरकार में डग्गामार बसों पर उंगली उठाकर शिकायत करने वाले भाजपाइयों को अब ये बसें दिखाई नहीं दे रही है। परिवहन राज्यमंत्री स्वतंत्र देव सिंह भी मामले को दिखवाने भर की बात कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं। सवाल उठता है कि आखिर ये बसें किसके संरक्षण में चल रही है जो इन्हें बंद करने का कोई भी साहस नहीं दिखा रहा है। अमर उजाला ने बृहस्पतिवार को इनकी पड़ताल की तो ये बसें दिल्ली रोड पर बेधड़क दौड़ती मिलीं।
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शहर के चारों तरफ डग्गामार बसों का राज 
शहर के चारों तरफ से निकलने वाले रूटों दिल्ली रोड, गढ़ रोड, हापुड़ रोड और बिजनौर रोड पर करीब 60 डग्गामार बसें बेरोकटोक दौड़ रही है। रोडवेज बसों के समानांतर चल रही इन बसों को न तो पुलिस पकड़ रही है और न ही आरटीओ के प्रवर्तन अधिकारी। 

हर माह साढ़े तीन करोड़ रुपये की चोट 
डग्गामार बसें रोडवेज को हर माह करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये के राजस्व की चोट पहुंचा रही हैं। रोडवेज अधिकारियों के मुताबिक एक डग्गामार बस से रोजाना करीब 20 हजार रुपये की आय होती है। 60 बसों से रोजाना 12 लाख रुपये की कमाई इनके संचालक करते हैं। महीने में ये कमाई 3 करोड़ 60 लाख तक पहुंच जाती है।  
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बस अड्डे और रेलवे रोड चौराहे के पास से बैठाती है सवारी 
डग्गामार बस स्टाफ इतना बेखौफ है कि पूरी तरह अवैध होने के बावजूद भैसाली बस अड्डे के निकट से सवारी उठाई जाती है और यहीं पर उतारी जाती हैं। इसके अलावा फैज-ए-आम इंटर कॉलेज और रेलवे रोड चौराहे से इन बसों का संचालन होता है।

पुलिस भी है मौन
इन बसों का संचालन पुलिस के सामने हो रहा है। रेलवे रोड पर थाना भी है और चौराहे पर हर समय ट्रैफिक पुलिस रहती है। चौराहे के निकट केके इंटर कॉलेज के सामने इन बसों ने अपना स्थायी स्टॉपेज बना रखा है। ये बसें यहां से रोजाना चलती हैं। इसके बाद भी पुलिस इन पर कार्रवाई नहीं कर रही।

‘चढ़ावा’ देकर चलाते हैं बस
टीम ने रेलवे रोड चौराहे पर खड़ी बस के स्टाफ से बात की तो उन्होंने नाम व पहचान उजागर नहीं करने की शर्त पर बताया कि आरटीओ स्टाफ से लेकर रूट के सभी थानों को चढ़ावा चढ़ाना पड़ता है। 10 साल पुरानी बसों को एनजीटी के आदेश से हटा दिया है। अब वे ही बसे चल रही है जिनकी उम्र दस साल से कम है।

पूर्व दर्जा प्राप्त मंत्री की दौड़ रही बसें
बस स्टाफ ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि ये बसें सपा सरकार में दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री की है। जो योगी सरकार में भी बड़े आराम से दौड़ रही हैं। इन सभी बसों को पहचान देने के लिए वैशाली मेट्रो लिखा गया है। इसके अलावा भी कई अन्य नेताओं की भी बसें हैं। वहीं कई बसों का उनका संरक्षण मिल रहा है।

संज्ञान में नहीं है मामला
डग्गामार बसों के संचालन पर पूरी तरह रोक लगाने के निर्देश दिए हुए हैं। मेरठ में इस तरह की बस चलने का मामला संज्ञान में नहीं है। वे कर्नाटक चुनाव में लगे हैं। यहां से आने के बाद इस मामले को दिखवाया जाएगा। - स्वतंत्रदेव सिंह, परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  
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