सामने बैठे थे तेंदुए, पर पकड़ नहीं सके
किठौर। आठ दिन बीतने के बाद भी विशेषज्ञों व वनकर्मियों की टीमें तेंदुओं को नहीं पकड़ पाई। कई घंटे तेंदुए नई लोकेशन पर पिंजरे के पास बैठे रहे। लेकिन पकडे़ नहीं जा सके। एसडीओ ने पुरानी लोकेशन से पिंजरे को हटवाकर नई लोकेशन के पास लगवा दिया है। तीनों पिंजरों में तेंदुए के लिए अलग-अलग चारा रखा गया है। इनके पकड़ में न आने से अब तीन गांवों के लोग दहशत में जीवन व्यतीत कर रहे हैं। ग्रामीण खेतों में जाने से कतरा रहे हैं।
वनकर्मी और विशेषज्ञों की टीम के भरसक प्रयास के बावजूद तेंदुआ सर्च ऑपरेशन सफल होता नहीं दिख रहा है। शुक्रवार रात नई लोकेशन पर लगाए गए पिंजरे के पास शनिवार तड़के तीन बजे एक तेंदुआ और दूसरा 10 बजे जाकर बैठ गया। दोनों तेंदुए शाम लगभग 4:30 बजे तक बैठे रहे। इन तेंदुओं को ग्रामीणों, वनकर्मियों और विशेषज्ञों की टीम ने बखूबी देखा, लेकिन पकड़ नहीं पाए। आलम यह रहा कि दोनों तेंदुए नई लोकेशन पर और टीम पुरानी लोकेशन पर डटी रही। वनकर्मी नई लोकेशन पर चक्कर लगाते और तेंदुओं को बैठे देख पुरानी लोकेशन पर लौट जाते।
तेंदुओं के डटे होने की सूचना पर शनिवार दोपहर एसडीओ आनंद प्रकाश मिश्र पहुंचे और दोनों लोकेशन का निरीक्षण कर पुरानी लोकेशन का पिंजरा हटवाकर नई लोकेशन के निकट लगवा दिया। इस दौरान पिंजरा ऊपर से क्षतिग्रस्त हो गया। टीम ने यहां से कैमरा टैप भी हटा लिया है। खास बात यह है कि फिलहाल एक-दो किमी की दूरी पर लगे तीनों पिंजरों में तेंदुए के लिए अलग-अलग चारा (एक में मुर्गा, दूसरे में मेमना और तीसरे में डॉगी) रखा गया है। उधर, ऑपरेशन में लगी दोनों टीमें अपनी नाकामी का ठीकरा ग्रामीणों की भीड़ के सिर फोड़ रही हैं। जबकि वास्तविकता यह है कि दृढ़ इच्छा शक्ति और संसाधनों का अभाव तेंदुए की गिरफ्त में सबसे बड़ी बाधा है।