केंद्र सरकार द्वारा पुराने बड़े नोट बंद करने के बाद अफरा-तफरी का माहौल है। बैंकों और एटीएम के बाहर लोगों की लंबी लाइन लग रही है। इस बात का किसी को अंदाजा नहीं है कि आगे क्या होने वाला है। हर कोई पैसा निकालने और जमा करने के लिए लाइन में लगा है। ऐसे माहौल में शहर के लोग क्या सोचते हैं और कहते हैं? इस पर अमर उजाला ने मोहकमपुर स्थित कार्यालय में परिचर्चा का आयोजन किया। इसमें शहर के व्यापारी, उद्यमी, समाजसेवी, चिकित्सक, शिक्षक, सीए और महिलाओं ने भाग लिया। सभी ने अपने विचार रखे और उनके विचारों से यही निष्कर्ष निकला कि यदि वास्तव में इस प्रक्रिया से काला धन बाहर आता है और भविष्य में इस पर रोक लगती है, तो यह परेशानी झेलने को तैयार हैं। लेकिन, इतना बड़ा कदम उठाने से पहले उसकी तैयारी जरूर कर लेनी चाहिए थी। कुछ वक्ताओं ने यह भी कहा कि भविष्य के नतीजे तो नहीं पता, लेकिन आम आदमी और गरीब वर्ग इस समय बिना पैसे के बुरी हालत में है।
तैयारी कर लेते तो बेहतर होता
- अचानक नोट बंदी से बाजार में अफरा-तफरी का माहौल है। व्यापारी इस समय पूरी तरह परेशान है। हालात ये हैं कि व्यापारी यदि थोक व्यापारी को पैसा दे रहा है तो वह सिक्कों और खुले रूप में दे रहा है, जिसका कलेक्शन मुश्किल होता है। यह फैसला पूरी तैयारी के बाद लेना था, ताकि छोटा वर्ग और व्यापारी परेशान न होता। -नवीन गुप्ता, अध्यक्ष, संयुक्त व्यापार संघ
चाय की ही दुकानें बंद करा दीं
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चाय की दुकान चलाते थे और उन्होंने चाय वालों की ही दुकान बंद करा दी है। नोट बंदी का सबसे ज्यादा असर चाय, पान जैसे खोखा व्यापारियों को हुआ है। जबकि, अंबानी जैसे तमाम बड़े उद्योगपति इससे बेअसर हैं। यह निर्णय पूरी तरह तानाशाही पूर्ण है। इससे काला धन बाहर नहीं आएगा, बल्कि कुछ लोगों का काला धन खपाने का इंतजाम किया गया है। - विपुल सिंघल, व्यापारी नेता
अच्छे के लिए कष्ट ही सही
- नोट बंदी से रियल इस्टेट पूरी तरह टूट गया है और जल्दी उबरने की उम्मीद भी नहीं है। आज लेबर को देने के लिए पैसा नहीं है। अगर कोई पैसा जमा करने भी जाता है तो लोगों की लाइन इतनी लंबी होती है कि वह वापस आ जाता है। लेकिन कुछ अच्छा होता है, तो कष्ट सहना पड़ता है। काला धन जो बाहर आएगा, वह देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ देश को विकास के रास्ते पर ले जाएगा।
कमल ठाकुर, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, संयुक्त व्यापार संघ
काला धन अफसरों-नेताओं के पास
- सराफा कारोबार पर इस नोट बंदी का सबसे ज्यादा असर आया है। शादियों का सीजन था और लोग परेशान हैं। पैसे की निकासी की भी व्यवस्था सही तरह होनी चाहिए थी। अब सरकार को ध्यान देना चाहिए कि वास्तव में काला धन है कहां। क्योंकि, नजर व्यापारी की तरफ है, जबकि काला धन सरकारी अफसरों और नेताओं के पास है।
- दिनेश रस्तोगी, महामंत्री, सराफा व्यापार संघ
निचले तबके को ध्यान में रखना था
- नोट बंदी का निर्णय ठीक है, लेकिन उसका पर क्रियान्वयन सही तरीके से नहीं हो रहा है। काले धन के मुद्दे पर हम लोग महीने तक ऐसा संकट झेल सकते हैं, लेकिन उस मजदूर गरीब का क्या होगा, जो रोज कमाता है और रोज खाता है? अब नोट बंदी से फैक्ट्रियां बंद हैं तो ऐसे में इन लोगों का क्या होगा? सरकार को निचले तबके के लोगों के हितों को ध्यान में रखकर प्लानिंग से फैसला लेना था।
- हाजी ताज मोहम्मद अलव्री, एमडी हमराज दवाखाना
हमारी भी तो कुछ जिम्मेदारी है
- लेबर को पैसा देने में दिक्कत आ रही है। मैं खुद भी भट्ठा चलाता हूं, लेकिन सरकार के साथ हमारी भी कुछ जिम्मेदारी है। थोड़े दिन दिक्कत है तो उसके बाद सुधार भी होगा। अब सब लोग अपने बैंक खाते खुलवाएंगे। लेबर की मजदूरी चेक से जायेगी और बाकी भुगतान भी चेक के माध्यम से ही होंगे।
पवन मित्तल, महामंत्री, जनपद ईंट निर्माता समिति
पूरी तैयारी से नहीं लिया फैसला
- फैसला अच्छा है। इसे लेकर कोई शक नहीं है, लेकिन सरकार हर रोज नोट बदलने और निकासी के नए नियम बना रही है। इससे साफ है कि पूरी तैयारी के साथ फैसला नहीं लिया गया है। काले धन वालों को भले ही कोई समस्या हुई हो या न हुई हो, लेकिन आम आदमी लाइनों में खड़ा है और उसके बाद भी पैसा नहीं निकल रहा है।
- रितू भारती, संचालिका, कोचिंग सेंटर
आम आदमी को ध्यान में रखते
- हम लोग काले धन वाले लोगों की बात कर रहे हैं। उन पर लगाम कसनी चाहिए। हर आदमी सरकार को समर्थन भी कर रहा है, लेकिन लाइन में जो आदमी लगा है, उसकी परेशानी काले धन वाले से कहीं ज्यादा है। उसे लेकर सरकार को कुछ कदम उठाने चाहिए थे।
- ममता गर्ग, अध्यक्ष अभिलाष फाउंडेशन
फैसले के सुखद परिणाम आएंगे
- प्रधानमंत्री का निर्णायक कदम है। इससे काफी लोगों की हालत पतली है। अभी दिक्कतें हैं, लेकिन कुछ समय बाद सुखद परिणाम सामने आएंगे। हालांकि, नोटबंदी के बाद प्रधानमंत्री के मन में ज्वैलर्स को लेकर कुछ संशय है। इसे लेकर सरकार को आश्वस्त रहने की जरूरत है।
- विजय आनंद अग्रवाल, मंत्री संयुक्त व्यापार संघ
मांग के मुकाबले आपूर्ति नहीं
- मनी की डिमांड ब्लॉक की है, लेकिन उतनी बड़ी सप्लाई नहीं है, जिससे चौतरफा असर दिख रहा है। देश में ऐसे भी लोग हैं, जिनके पास न कोई एकाउंट है और न ही तिजोरी। सबसे ज्यादा उन्हीं लोगों को नोट बंदी से परेशानी होगी। लेकिन, लंबे समय बाद देश में भ्रष्टाचार के मोर्चों पर सुधार की उम्मीद सी जगी है।
- डॉ. मनोज सिवाच, अर्थशास्त्री
व्यावहारिक नहीं है फैसला
- सरकार ने डायरेक्ट इंजेक्शन दिया है। आज ट्रक बंद है। एक ट्रांसपोर्टर हूं, जिससे बता सकता हूं कि दो हजार या चार हजार रुपये लेकर किसी ट्रक को माल लोड कर नहीं भेजा जा सकता है। क्योंकि, ट्रक का टायर ही 10 हजार का आता है। अगर प्रदेश के बार ट्रक लोड करके भेजते हैं तो ड्राइवर को 40 से 50 हजार रुपये देना पड़ता है और यह कैश में चलता है। ऐसे में फैसला व्यावहारिक नहीं है।
- गौरव शर्मा, अध्यक्ष ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन
हम सब मिलकर निपटें
- हमारे देश में जब भी नेतृत्व अच्छा मिला है और उसने आह्वान किया है तो देश की जनता हर तरह से समर्पण के लिए खड़ी हुई है। जेपी से लेकर अन्ना के आंदोलन को देख सकते हैं। अब कुछ जनता को उम्मीद जगी है कि काले धन पर लगाम कस सकती है। कुछ व्यावहारिक दिक्कतें हैं, जिन्हें हम सभी को मिलकर निपटाना चाहिये। अगर किसी के पास कैश नहीं हो तो बाद में ले लें या फिर कार्ड स्वैप करा लें।
डॉ. वीरोत्तम तोमर (अध्यक्ष आईएमए)
फैसला अच्छा पर नीयत साफ नहीं
- फैसला अच्छा है, लेकिन नीयत साफ नहीं है। आज तक कोई काले धन वाला बैंकों के बाहर लाइन में नहीं लगा है, गरीब लोग ही लाइनों में खड़े हो रहे हैं। आज उनकी रोजी-रोटी तक पर संकट खड़ा हो गया है। अगर अच्छी नीयत से लागू किया है तो दीर्घकालीन नतीजे अच्छे होंगे, लेकिन अभी उसे लेकर स्थिति साफ नहीं है।
- हाजी फारूख अंसारी, नेता बुनकर संघ
नोट बंदी पर फैलाया जा रहा भ्रम
- नोट बंदी के बाद कुछ चीजों को लेकर भ्रम सा फैलाया जा रहा है कि 2.5 लाख से ऊपर अगर खाते में जमा किया तो काला धन होगा। आप 4-6 लाख, जितना भी जमा करें। इनकम टैक्स का नोटिस आएगा तो उसमें सिर्फ आपको इनकम का जरिया बताना होगा। अगर आप पूरा ब्योरा नंबर एक में देते हैं तो आप पर कोई पेनल्टी नहीं लगेगी।
- अभिषेक गोयल, सीए
किसानों की कोई नहीं सुन रहा
- सरकार के फैसले पर संशय खड़ा होता है। आज उनकी सुनने वाला कोई नहीं है, जो इस देश के अन्नदाता हैं। सरकार ने एक झटके में कोऑपरेटिव बैंक में ट्रांजैक्शन पर रोक लगा दी है। मेरठ में हमारी 53 शाखाएं हैं और 5 लाख किसान जुड़े हैं। इनमें से अधिकांश किसानों के एकाउंट सिर्फ हमारे बैंकों में हैं। अब बैंक पर रोक लगाने से उनके पैसे नहीं निकल रहे हैं। किसान फसल की बुआई कैसे करें, इस पर कोई बात नहीं हो रही है।
- नगेंद्र कुमार, अध्यक्ष, कोऑपरेटिव बैंक इंप्लाइज यूनियन मेरठ
जैसे हर आम आदमी के पास काला धन हो
- सरकार ने निहायत ही गैर व्यावहारिक फैसला लिया है। आज लाइन में लगे आम आदमी को देखकर लगता है कि हर आदमी काले धन वाला है। देश में चुनिंदा लोगों के पास ही काला धन है, जिनके बारे में सरकार भी जानती है, लेकिन आज तक उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। आम आदमी को काले धन के नाम पर बैंकों के बाहर लाइनों में लगा दिया है।
- इंद्रपाल सिंह, दवा व्यापारी
दो-चार हजार वालों को दिक्कत नहीं
- सरकार की नीति और नीयत पर कोई शक नहीं होना चाहिए। देश की जनता हर उस सरकार के साथ खड़ी हुई है, जिसने देश में बड़े बदलाव या भ्रष्टाचार पर लगाम कसने की पहल की है। अब अगर सरकार ने निर्णय लिया है तो कुछ सोचकर ही लिया है। इससे 2-4 लाख रुपये वालों को कोई दिक्कत नहीं होगी, लेकिन 2-4 करोड़ रखने वालों पर जरूर लगाम कसेगी।
- अरुण वरिष्ठ, महामंत्री संयुक्त व्यापार संघ
फर्क तो छोटे व्यापारी पर पड़ा है
- सरकार का निर्णय लापरवाही भरा है। नोट बंदी से पहले देश के सवा सौ करोड़ लोगों के बारे में नहीं सोचा गया है। आज भी बड़े व्यापारी पर कोई फर्क नहीं पड़ा है। अगर फर्क पड़ा है तो छोटे व्यापारी पर। बड़े व्यापारियों ने तो अपना काला धन खपाने के लिए मजदूरों को लाइनों में लगा दिया है। वहीं, बैंकों के अंदर भी 20 से 30 फीसदी पर काले धन वालों का पैसा बदलने का काम चल रहा है।
- राकेश मोहन जैन, अध्यक्ष अहमद रोड व्यापार संघ
आम आदमी को परेशान किया जा रहा
- आम आदमी को परेशान किया जा रहा है। भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाले लोगों पर लगाम कसनी चाहिए। आखिर जो लोग रिश्वत दे रहे हैं, वो ऐसा क्यों कर रहे हैं। सरकारी अधिकारियों को रिश्वत देने वाले वर्ग के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए
- एसके शर्मा, सामाजिक कार्यकर्ता
भ्रष्ट लोगों पर कसेगी लगाम
- इस फैसले से उन लोगों पर लगाम कसी जा सकेगी, जो अपने बिस्तर में नोट रखकर सोते थे। मैं पेशे से टीचर हूं। हमारे यहां पर लोग ट्रांसफर कराने के लिए लाख-दो लाख रुपये रिश्वत में देते हैं। अब जब प्लास्टिक मनी या चेक से पेमेंट होगा तो ऐसे लोगों पर भी लगाम कसेगी।
- डॉ. लता कुमार, समाजशास्त्री
ये भी रहे मौजूद
डॉ. चंद्रलेखा जैन, राजीव ढाका, डॉ. आशु मित्तल, डॉ. नवनीत अग्रवाल, संजय गोदावरी, पार्षद तरुण गोयल, अमन गुप्ता, डॉ. जितेंद्र पाल, पवन गर्ग, सतीश चंद जैन, एसके शर्मा, सरदार खेता सिंह, स्वरूप चौधरी, मोहम्मद अतीक अलवी, रश्मि अग्रवाल, अंकुर अग्रवाल, मनीष शर्मा भी मौजूद रहे।