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सड़क सुरक्षा के दावों पर भारी हादसों के सिलसिले 

Wed, 29 Aug 2018 12:50 AM IST
amarujala
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file - फोटो : amarujala
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 हर रोज दुघर्टनाएं होती हैं। मौके पर ही पलभर में जान चली जाती हैं। घायल सड़क से लेकर हॉस्पिटल तक तड़पते हैं। घायलों के इलाज के लिए परिवार को भी आर्थिक समस्याओं से जूझना पड़ता है। रोड सेफ्टी के लिए दावे बड़े बड़े किए जाते हैं, लेकिन प्रत्येक साल के आंकड़े इस भयावहता को बताने के लिए काफी हैं। ऐसा कोई दिन नहीं जाता, जब किसी की जान न जाती हो। ब्लैक स्पॉट चिन्हित हैं, लेकिन हादसों के प्रति पूरा सिस्टम सो रहा है।
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सड़क दुघर्टनाओं को रोकने के लिए ट्रैफिक पुलिस के साथ साथ एनएचएआई, विकास प्राधिकरण, नगर निकाय, पीडब्लूडी की भी जिम्मेदारी बनती है। ट्रैफिक पुलिस के आंकड़ों की बात करें तो सबसे ज्यादा मौत नेशनल हाईवे पर होती है। उसके बाद स्टेट हाईवे का नंबर आता है। प्रत्येक दिन तीन से चार सड़क दुघर्टनाएं होती हैं। हर रोज एक व्यक्ति की जान सड़क हादसे में चली जाती है। चार व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं। यह आंकड़े तो वह हैं जिनकी एफआईआर दर्ज की जाती है। बाकी का पुलिस के पास कोई रिकार्ड नहीं होता। उपचार के दौरान मौत की संख्या भी पुलिस रिकार्ड में नहीं दर्शायी जाती। ऐसे भी मामले आते हैं जिनमें घायलों की एक एक माह या अधिक समय तक इलाज चलने के बाद मौत होती है।
नेशनल हाईवे और स्टेट हाईवे पर सड़क दुघर्टनाओं का सबसे बड़ा कारण ब्लैक स्पॉट हैं। कभी इनके लिए संबंधित विभाग के अधिकारियों ने काम नहीं किया। चिन्हिकरण कर ब्लैक स्पॉट छोड़ दिए जाते हैं। सड़क सुरक्षा अभियान या फिर यातायात माह में भी ये सिर्फ पुलिस को ही याद रहते हैं, अन्य विभाग तो पल्ला झाड़े रहते हैं।
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जानलेवा हैं ब्लैक स्पॉट
पुलिस के आंकड़ों में 25 ब्लैक स्पॉट हैं। एनएच-58 (दिल्ली-देहरादून हाईवे), दिल्ली-पौड़ी मार्ग, मेरठ-बुलंदशहर हाईवे और शहर में भी ब्लैक स्पॉट चिन्हित हैं। मेरठ पौड़ी मार्ग पर डेयरी फार्म तिराहा, फिटकरी पुलिया, मवाना तिराहा और बहसूमा बाईपास मोड़ हैं। ये वह ब्लैक स्पॉट हैं जहां प्रत्येक साल सड़क दुघर्टनाओं में जान जाती है। यहां न तो साइन बोर्ड लगे हैं और न ही स्पीड ब्रेकर हैं। पुलिस की तरफ से भी कोई चेतावनी या सूचक नहीं है। इंजीनियरिंग की दिशा में भी इन पर कोई काम नहीं हुआ। कहीं डिवाइडर कट हैं तो कही सर्विस रोड का कट। सड़क पर अचानक से मोड़ के कारण भी हादसे होते हैं।

नेशनल हाईवे की स्थिति
दिल्ली से मेरठ मार्ग पर रिठानी पीर
मोहिउद्ीनपुर  शुगर मिल
परतापुर क्षेत्र स्थित भूड़बराल
परतापुर तिराहा दिल्ली से दूरी 52 किमी
घाट तिराहा, दिल्ली से 57 किमी दूर
सकौती फ्लाईओवर दिल्ली से 82 किमी
नंगली गेट दिल्ली से 80 किमी दूर
रूहासा कट दिल्ली से 78 किमी
दौराला में भराला कट 75 किमी
सिवाया कट 73 किमी
दिल्ली- देहरादून बाईपास पर खड़ौली कट 60 किमी
दौराला थाना स्थित सर्विस रोड कट

मेरठ में सड़क दुघर्टनाएं
वर्ष        दुघर्टना संख्या                    मृतक संख्या      घायल संख्या

2013     882                                467                   848
2014     1047                              384                   921
2015     952                                386                  728
2016     977                                 421                  758
2017     1040                               417                  808
2018     615                               259                    433
ये आंकड़े ट्रैफिक पुलिस के अनुसार हैं।
2018 के आंकड़े एक जनवरी से 31 जुलाई तक हैं।


वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के डॉ. गौरव गुप्ता बताते हैं कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार 2016 में सड़क हादसों में सबसे ज्यादा लोग यूपी में मारे गए हैं। इससे पूर्व के वर्षाें में भी यूपी में सड़क दुघर्टनओं का ग्राफ अधिक रहा है। 2017 की भी स्थिति कुछ ऐसी ही रही कि हाईवे पर  सबसे ज्यादा लोग सड़क दुघर्टनाओं का शिकार होते हैं। 2016 में प्रदेश में कुल 35,612 सड़क हादसे हुए। इनमें 25,096 लोग घायल हुए और 19320 लोगों की मौत हुई। मरने वालों में यूपी के बाद तमिलनाडु का स्थान आता है। रिसर्च व अलग अलग संस्थाओं के सर्वे में सबसे अधिक मौत हाईवे पर होती हैं। इनमें ब्लैक स्पॉट भी एक महत्वपूर्ण कारण हैं। यदि ब्लैक स्पॉट पर संबंधित विभाग के साथ पुलिस भी अलर्ट रहे तो सड़क दुघर्टनाओं में कमी आ सकती है। देश में प्रत्येक वर्ष यूपी में सबसे अधिक सड़क हादसों में लोगों की जान जाती हैं।

लगातार चले जागरूकता अभियान
एसपी ट्रैफिक संजीव बाजपेयी का कहना है कि रोड सेफ्टी के लिए ट्रैफिक पुलिस लगातार स्कूल, कॉलेज में छात्र- छात्राओं को जागरूक करते हुए यातायात नियमों की जानकारी देती है। वाहन चलाते समय हमें खुद भी ट्रैफिक नियमों का पालन कर जागरूक होना पड़ेगा। पुलिस रिकार्ड में भी 2017 में 417 लोगों की सड़क हादसों में मौत दर्ज हैं इनमें करीब 80 प्रतिशत दुघर्टनाएं नेशनल हाईवे और स्टेट हाईवे पर हुई हैं। 
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