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वैराग्य और चारित्र से ही संभव मोक्ष : भाव भूषण

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संवाद न्यूज एजेंसी
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हस्तिनापुर। कस्बे के श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर स्थित त्रिमूर्ति जिनालय में चल रहे श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान के दूसरे दिन बृहस्पतिवार को श्रद्धा और भक्ति का माहौल रहा। प्रातःकालीन सत्र में श्रद्धालुओं ने जाप्य अनुष्ठान किया, जिसके बाद भगवान शांतिनाथ का विधिवत अभिषेक संपन्न हुआ।

शांतिधारा करने का सौभाग्य वीरेंद्र कुमार जैन और अरुण जैन को प्राप्त हुआ। श्रद्धालुओं ने मंत्रोच्चार के साथ शांतिधारा का श्रद्धापूर्वक श्रवण किया। मुनि भाव भूषण महाराज ने अपने प्रवचनों में सिद्धों के आठ मूल गुणों का वर्णन करते हुए कहा कि पंचपरमेष्ठी पूज्य हैं लेकिन सिद्ध परमेष्ठी सर्वोच्च पद को प्राप्त करते हैं। उन्होंने बताया कि सिद्ध भगवान तीन लोक से ऊपर अष्टम भूमि सिद्धशिला में विराजमान होते हैं।
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उन्होंने कहा कि सिद्धचक्र विधान के माध्यम से सिद्धों का गुणगान करने से मनुष्य भी आत्मशुद्धि के मार्ग पर अग्रसर होकर सिद्धत्व प्राप्त कर सकता है। साथ ही उन्होंने वैराग्य और चारित्र को मोक्ष का आधार बताते हुए कहा कि बिना वैराग्य के शास्त्र ज्ञान भी अधूरा है।
विधानाचार्य पंडित शरद कुमार जैन व पंडित आशीष जैन शास्त्री के निर्देशन में श्रद्धालुओं ने मंडल पर 128 अर्घ्य अर्पित किए। कार्यक्रम में विपिन जैन, सुधीर जैन, गौरव जैन, राकेश जैन, प्रफुल्ल जैन, ऋषि जैन, सुभाष चंद जैन, आलोक जैन सहित अनेक श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
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संध्याकाल में पंचपरमेष्ठी भगवान की आरती, सिद्धचक्र विधान की आरती, शास्त्र प्रवचन एवं पुरस्कार वितरण हुआ। पुरस्कार वितरण का सौभाग्य वीरेंद्र जैन को मिला। आयोजन की व्यवस्थाओं में अध्यक्ष जीवेंद्र कुमार जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र कुमार जैन सहित अन्य पदाधिकारियों का विशेष सहयोग रहा।
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