- आर्य समाज थापरनगर में हुआ रविवारीय सत्संग का आयोजन
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। आर्य समाज थापरनगर में रविवारीय सत्संग में स्वामी श्रद्धानंद का 99वां बलिदान दिवस श्रद्धा के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में आर्य समाज के प्रधान राजेश सेठी ने बताया कि स्वामी श्रद्धानंद का जन्म 22 फरवरी 1857 को जालंधर के तलवन ग्राम में हुआ। उनके पिता नानक चंद कोतवाल थे। बाल्यकाल में उनका नाम मुंशी राम रखा गया। पिता के निरंतर स्थानांतरण, प्यार एवं कुसंग के कारण उनका प्रारंभिक जीवन दुर्व्यसन पूर्ण रहा।
प्रधान राजेश सेठी ने बताया कि पिता का स्थानांतरण बरेली होने पर उनके आग्रह पर वहां अगस्त 1889 में स्वामी दयानंद के प्रवचन सुनने के बाद उनके जीवन में परिवर्तन हुआ। उन्होंने ने स्वामी जी से अनेक प्रश्न किए पर स्वामी जी के तार्किक विश्लेषण से निरुत्तर हो गए। 1898 में गुरुकुल की स्थापना का संकल्प लिया और 1902 में हरिद्वार में गुरुकुल कांगड़ी की स्थापना की। गुरुकुल के संचालन के लिए अपनी जालंधर की कोठी, सारा धन और जीवन समर्पित कर दिया। 1915 में गांधीजी गुरुकुल कांगड़ी में आए तो उन्हें महात्मा की उपाधि से विभूषित किया। इसके बाद 1919 में स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े।
कार्यक्रम में स्वामी श्रद्धानंद प्यारा है, तन मन धन जिसने देश पर वारा है...गीत सुनाकर प्रीति सेठी ने श्रद्धांजलि अर्पित की। विदुला सोनी, कमलेश चांदना, शिव कुमार भसीन, प्रीति सेठी, मंजु वासुदेवा ने भी सुंदर भजन प्रस्तुत किए। आचार्य सत्य प्रकाश शास्त्री के ब्रह्मत्व में देवयज्ञ संपन्न हुआ। यजमान सुनीता, मुकेश एवं विदिश जिंदल रहे। इस अवसर पर आनंद वर्धन झा, भानु बत्रा, अपर्णा अग्रवाल, विकास शर्मा, कृष्ण कुमार वर्मा, चंद्र वासुदेवा, अरविंद कुमार, राकेश ओबराय सहित अन्य मौजूद रहे।