अभिनेता सलमान खान और शाहरुख खान द्वारा काली मां के मंदिर में जूते पहनकर जाने की शिकायत के वाद में सोमवार को स्पेशल मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) कोर्ट में बहस पूरी हो गई। न्यायालय ने प्रार्थना पत्र पर आदेश के लिए पत्रावली 24 जनवरी के लिए रिजर्व कर ली है।
वादी अखिल भारत हिंदू महासभा के पदाधिकारी भरत राजपूत ने गिरजा शर्मा अधिवक्ता की तरफ से स्पेशल सीजेएम की कोर्ट में धारा 295, 295ए, 153 ए आईपीसी के तहत प्रार्थना पत्र दिया था। जिसमें अभिनेता सलमान खान और शाहरुख खान के अलावा वाई कोम 18 मीडिया कंपनी और यू ट्यूब के सीईओ और बिग बोस के डायरेक्टर और क्रिएटिव हेड को प्रतिवादी बनाया गया। प्रार्थनापत्र में आरोप लगाया कि विगत 20 दिसंबर 2015 की रात कलर्स चैनल पर बिग बोस नामक कार्यक्रम दिखाया गया।
जिसमें एक दृश्य में अभिनेता सलमान खान और शाहरुख खान को जूते पहनकर काली मां के मंदिर में जाते हुए दिखाया गया। उन्होंने इस पर विरोध दर्ज कराते हुए संबंधित सभी पक्षों से आग्रह किया था कि इन दोनों अभिनेताओं के इस कृत्य से हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को बेहद ठेस पहुंच रही है, इसलिए इस दृश्य को न दिखाया जाए। इसके बावजूद भी इसे दिखाया गया। न्यायालय ने प्रार्थना पत्र की सुनवाई कर पत्रावली निर्णय के लिए 24 जनवरी के लिए रिजर्व कर ली है।
कोर्ट में चलाकर देखी गई सीडी
प्रार्थना पत्र पर बहस करते हुए अधिवक्ता द्वारा इस पूरे प्रकरण की सीडी भी न्यायालय को सौंपी गई। जिस पर सीडी को न्यायालय में चलाए जाने के आदेश जारी किए गए। सोमवार दोपहर बाद दो बजे न्यायालय में ही लैपटॉप लाया गया। न्यायालय में न्यायिक अधिकारी संजय सिंह और वहां मौजूद सभी अधिवक्ताओं ने सीडी को देखा। न्यायालय ने सीडी को देखने के बाद उक्त सीडी पत्रावली में रखे जाने के आदेश भी जारी किए।
क्या कहती हैं धाराएं
धारा 295 आईपीसी: किसी वर्ग के धर्म का अपमान करने के आशय से उपासना के स्थान को क्षति करना या अपवित्र करना। दो वर्ष तक का कारावास या जुर्माना या दोनों।
धारा 295 ए आईपीसी: विमर्शित व विद्वेषपूर्ण कार्य, जो किसी वर्ग के धर्म या धार्मिक विश्वासों का अपमान करके उसकी धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आशय से किए गए हों। तीन वर्ष तक का कारावास या जुर्माना या दोनों।
धारा 153 ए आईपीसी: धर्म, मूलवंश, जन्मस्थान, निवास स्थान, भाषा इत्यादि के आधारों पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता का सम्प्रवर्तन और सौहार्द बने रहने पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले कार्य करना। तीन वर्ष तक का कारावास या जुर्माना या दोनों।