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सैलरी न मिलने पर मेडिकल कॉलेज छोड़ रहे एसआर

Tue, 12 Jul 2016 02:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरों
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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लाला लाजपत राय मेमोरियल मेडिकल कॉलेज को अलविदा कहने वाले सीनियर रेजीडेंट डॉक्टर (एसआर) की संख्या तेजी से बढ़ रही है। मेडिसन, सर्जरी, हड्डी और रेडियोलॉजी विभाग में सीनियर रेजीडेंट डॉक्टरों की कमी से संकट गहरा गया है। टाइम पर सैलरी ना मिलने से नाराज ऐसे डॉक्टर दूसरे मेडिकल कॉलेजों का रुख कर रहे हैं। कॉलेज प्रशासन का तर्क है कि फाइल शासन में है। बजट जारी होते ही सैलरी दे दी जाएगी।
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 मेडिकल कालेज में एसआर को बीते पांच महीने से सैलरी नहीं मिली है। जिसको लेकर वे कई दफा कालेज प्रशासन से संपर्क भी कर चुके हैं। एसआर का कहना है कि कॉलेज प्रशासन फाइल शासन में बता रहा है, लेकिन शासन आगरा, झांसी और प्रदेश के अन्य मेडिकल कॉलेजों के सीनियर रेजीडेंट की सैलरी दे चुका है। ऐसे में अकेले मेरठ मेडिकल कॉलेज के एसआर को सैलरी ना मिलने पर संदेह खड़ा होता है।
पीजी पूरी होते ही अलविदा
खास बात यह है कि मेडिकल कॉलेज से परास्नातक (पीजी) कंप्लीट करने के बाद एसआर दूसरे मेडिकल कॉलेज ज्वाइन कर रहे हैं। जबकि सामान्य तौर पर जैसे ही पीजी कंप्लीट होती है तो निर्धारित सीटों पर कॉलेज प्रशासन एसआर के तौर पर ज्वाइनिंग करा देता है।
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इससे कॉलेज में चिकित्सकों की कमी नहीं होती है। अब हड्डी में एसआर की पांच सीटें हैैं। लेकिन अब तीन ही कार्यरत हैं। बाकी पीजी करने के बाद रिजाइन दे चुके हैं। बताया जा रहा है कि करीब छह एसआर छोड़कर जा चुके हैं। एसआर डॉ. अंकित वर्मा का कहना है कि कई दफा प्राचार्य दफ्तर में संपर्क  किया है। हर बार यह तर्क दिया जा रहा है कि शासन से बजट नहीं मिला है। तो फिर बाकी कॉलेजों में सीनियर रेजीडेंट्स को सैलरी कैसे मिल रही है।

प्रभावित होगा इलाज
सीनियर रेजीडेंट की कमी होने के कारण ओपीडी से लेकर, इमरजेंसी और वार्डों में भर्ती मरीजों का इलाज प्रभावित हो रहा है। हड्डी में ऑपरेशन की रफ्तार धीमी पड़ गई है तो इमरजेंसी में सीनियर रेजीडेंट की संख्या सीमित हो गई है। अब अगर यही सिलसिला जारी रहता है तो बाकी विभागों में भी इलाज प्रभावित होगा।
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