एक ट्रस्ट विहिप ने श्रीराम जन्मभूमि न्यास बनाया था, दूसरा ट्रस्ट चारों शंकराचार्य, वैष्णवाचार्यों और 13 अखाड़ों ने मिलकर रामालय न्यास बनाया था और तीसरा श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण न्यास है, जिसे अयोध्या के ही महंत जन्मेजय ने बनाया था। उन्होंने कहा कि न्यायालय के फैसले में है कि जो ट्रस्ट फैसला आने से पहले का है, उसी को मंदिर बनाने की जिम्मेदारी सौंपी जाए।
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण न्यास के महंत जन्मेजय लिखकर दे चुके हैं कि अगर रामालय न्यास को मंदिर बनाने का अवसर मिलता है तो उनका ट्रस्ट दावा नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि विहिप ने 1985-86 में ट्रस्ट बनाया था। सन 1993 में भूमि अधिग्रहण हुआ था। भूमि अधिग्रहण से पहले के ट्रस्ट को मंदिर बनाने का अधिकार है ही नहीं। अब केवल रामालय न्यास ही बचता है, जो श्रीराम मंदिर बनाएगा।
अयोध्या को पर्यटनस्थल न बनाएं
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि अयोध्या में तीर्थ भावना जुड़ी रही है, उसे पर्यटनस्थल न बनाया जाए। पर्यटक केवल आनंद लेने जाता है। जब तीर्थ यात्री जाता है तो वह कहता है कि अब हमें भगवान की कृपा मिल गई।
ओवैसी धार्मिक मुसलमान नहीं
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि हिंदू, मुस्लिम, ईसाई सभी धर्म के युवा मूल मार्ग से भटक रहे हैं। एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी के बारे में कहा कि वह धार्मिक मुसलमान भी नहीं हैं। वह राजनेता हैं, मंदिर के मामले में भी राजनीति का प्रयास कर रहे हैं।