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सहारनपुर को सुलगाने वाला 'रावण' हुआ गिरफ्तार, दंगे की पूरी कहानी...

Thu, 08 Jun 2017 07:09 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
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भीम आर्मी अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद
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सहारनपुर जातीय हिंसा के मास्टरमाइंड और भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर आजाद उर्फ 'रावण' को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। अगर आप सहारनपुर दंगे से जुड़ी हर घटना के बारें में जानना चाहते हैं तो एक क्लिक में पढ़ें।  
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सहारनपुर के शब्बीरपुर गांव में पांच मई को डॉ. अंबेडकर की शोभा यात्रा पर पथराव किया गया था। जिसे लेकर दो समुदायों में बवाल हो गया था और दोनों पक्षों के दर्जनों लोग घायल हो गए थे। इसके बाद 9 मई को फिर से शब्बीरपुर गांव में बवाल हो गया और एक पक्ष के लोगों ने करीब आठ-नौ जगह आगजनी की थी। इतना ही बल्कि पुलिस चौकी में भी आग लगा दी और कई गाड़ियां फूंक दी थी। इसके बाद बार-बार दंगा होता रहा और लोगों में मारकाट होती रही। वहीं 23 मई को बीएसपी सुप्रीमो मायावती के पहुंचने से पहले भी बवाल हुआ और मायावती के निकलने के बाद तो भारी बवाल हो गया था। जिसमें एक की मौत हो गई थी और कई लोगों को धारदार हथियार से काटकर जख्मी कर दिया था। इसके अगले दिन भी सहारनपुर में बवाल हुआ और एक को गोली मार दी गई। जबकि दो को धारदार हथियार से काट दिया गया था। हालांकि इसके बाद भी कई बार दंगा हुआ।

चंद्रशेखर ने सोशल मीडिया पर डाले थे जहरीले पोस्ट

भीम आर्मी अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद
पिछले दो महीनों में भीम आर्मी को लेकर कई सवाल उठे। भीम आर्मी के नाम से सोशल मीडिया पर लोगों को उकसाया गया और उनमें बदले की हिंसा पैदा की गई। एक सवाल यह भी उठा कि जब मायावती को पता था कि सहारनपुर जातीय हिंसा से उबल रहा हैं तो ऐसे में उन्हें वहां जाकर सभा नहीं करनी थी। क्योंकि अगर भीड़ इकट्ठा न होती तो शायद सहारनपुर में फिर से बवाल नहीं होता ? वहीं भीम आर्मी अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद उर्फ 'रावण' ने भी सोशल मीडिया पर कई भड़काऊ वीडियो वायरल किए।  

जबकि मायावती का कहना है कि दंगे के पीछे भाजपा का हाथ है और सहारनपुर में लगातार बीजेपी ही दंगा करा रही है। अब सच्चाई क्या है ये जानने के लिए देश का हर नागरिक बेताब हैं।   

वहीं जातीय संघर्ष में कोई सुधार न होने पर योगी सरकार ने डीजीपी को फटकार लगाई थी और कड़ी कार्रवाई करते हुए सहारनपुर के डीएम एनपी सिंह व एसएसपी सुभाष चंद्र दुबे को हटा दिया था। बताया गया कि एसएसपी और डीएम सहारनपुर बवाल को काबू नहीं कर सके, इसलिए उनका तबादला कर दिया गया। उनकी जगह अब नए एसएसपी व डीएम को तैनात किए गए।
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23 मई को भी हुआ बवाल

भीम आर्मी अध्यक्ष गिरफ्तार
गौरतलब है कि बसपा सुप्रीमो मायावती सहारनपुर में पीड़ित लोगों से जनसंपर्क करने गई थीं, लेकिन जनसंपर्क कैसे सभा में तब्दील हो गया ये तो पता नहीं चला। इसके बाद जैसे ही मायावती की जनसभा खत्म हुई तो पहले तैयार बैठे हमलावरों से भीड़ पर हमाला बोल दिया और दो को गोली मार दी जबकि कईयों को धारदार हथियार से काट दिया। इससे वहां और जाता हिंसा भड़क उठी। बताया गया था कि मायावती को सिर्फ वहां जाने की इजाजत मिली थी न कि सभा करने की। मायावती अगर वहां भीड़ को इकट्ठा नहीं करती तो शायद ये बवाल नहीं होता ?

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