सहारनपुर में जातीय हिंसा के बाद दलितों में डर
सहारनपुर में पिछले एक-डेढ़ माह से चल रहे जातीय संघर्ष ने दलितों के भीतर ऐसा खौफ पैदा कर दिया कि आज दलित ठाकुरों के खेत में काम करना तो दूर, उनके खेतों के आसपास जाने से भी डर रहे हैं। देखा जाए तो ऐसे तो दलितों का रोजगार भी छीन गया है। एक समय था जब दलित और ठाकुर एक साथ मिल जुलकर रहते थे, लेकिन आज दोनों पक्षों के सामने परेशानियों का पहाड़ सा खड़ा हो गया है।
आपको बता दें कि सहारनपुर के शब्बीरपुर गांव में बहुत समय पहले, एक दल के मजदूर ओमवीर और ठाकुर अमरपाल सिंह काम के लिए एक दूसरे पर निर्भर थे। लेकिन आज, शब्बीरपुर गांव के इन दो निवासियों को एक-दूसरे के काम आना तो बहुत दूर की बात है कि आज ये आपस में मिल भी नहीं सकते हैं। ये सब सहारनपुर में हुए दंगे की देन हैं।
सहारनपुर में हुए जातीय संघर्ष ने दो समुदायों के बीच ऐसी दरार पैदा कर दी है कि आज दोनों पक्षों के लोग एक-दूसरे के खून प्यासे हैं। जहां कभी दोनों पक्षों के लोग एक-दूसरे के साथ बैठा करते थे और एक साथ काम किया करते थे। लेकिन अब सहारनपुर के शब्बीरपुर के गांव का माहौल कुछ और ही हैं।
दलित और ठाकुरों में नहीं रहा भाईचारा
अधिकारी पहुंचे सहारनपुर
वहीं दलित समाज के ओमवीर ने बताया कि कभी हम ठाकुरों के खेतों में काम करते थे लेकिन आज तो उनके खेतों में क्या अपने घर के पास ही डर लगता है। ओमवीर ने कहा कि हमें मालूम हैं कि अब वो हमें काम नहीं देंगे।
सहारनपुर के शब्बीरपुर गांव का आज ये मंजर हैं कि जमींदार ठाकुर दलितों से काम कराना पसंद नहीं करते हैं यहां तक कि बाहर से लोगों को काम पर ला रहे हैं। ऐसे में दलितों को काम न मिलने से दलितों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा हैं। हालांकि ऐसे में ठाकुरों को भी बाहर से मजदूर लाने में काफी परेशानी हो रही हैं।
आपको बता दें कि 5 मई को सहारनपुर में अंबेडकर शोभायात्रा पर दूसरे पक्ष के लोगों ने पथराव कर दिया था, इसके बाद दलितों ने 9 मई को करीब शहर से नौ जगह तोड़फोड़ कर आगजनी कर दी थी जिससे सहारनपुर में जातीय हिंसा पैदा हो गई थी। इसके बाद तो लगातार दंगे पर दंगे होते रहे और दोनों पक्षों के लोग आपस में एक-दूसरे पर हमला करते गए।
सहारनपुर में 23 मई को हुआ था बड़ा बवाल
दलितों और ठाकुरों के बीच तनाव बरकरार
इससे पहले 23 मई को बीएसपी सुप्रीमो मायावती के जाने से पहले भी सहारनुपर के शब्बीरपुर दंगा हुआ तो मायावती के निकलते ही तो भारी बवाल हो गया। उस दौरान दो को गोली मार दी गई था जबकि कईयों को धारदार हथियार से काट दिया था। इसके बाद भी बवाल बंद नहीं हुआ और अगले ही दिन दूसरे पक्ष के लोगों ने राजपूतों पर हमला बोल दिया। उन्होंने एक को गोली मार दी थी और दो को धारदार हथियार से कट दिया था।
सहानपुर में यहीं वजह है कि आज दलित और ठाकुर एक-दूसरे की जान के दुश्मन बने बैठे हैं। इससे से दलितों और ठाकुरों का वो प्रेम-भाव खत्म हो गया है। अब इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि आज कैसे ठाकुर (अमरपाल सिंह) और दलित (ओमवीर सिंह) एक-दूसरे के दुश्मन बन गए है जो कभी एक दूसरे के हर सुख-दुख में काम आते थे।
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