सवाल पूछने वालों के ही जवाब देते हैं मुफ्ती: मुजम्मिल
जामिया तुश शेख हुसैन अहमद अल मदनी के मोहतमिम मौलाना मुजम्मिल अली का कहना है कि दारुल उलूम स्थापना के समय से अपनी डगर पर कायम है और आगे भी रहेगा। दारुल उलूम में जो लोग सवाल लेकर इस्लामी रहनुमाई के लिए आते हैं, मुफ्ती केवल उसी का जवाब कुरआन और हदीस की रोशनी में देते हैं। मुफ्ती खुद से कोई फतवा जारी नहीं करते हैं। उनका मकसद केवल लोगों की समस्याओं का समाधान दीन और इस्लाम की रोशनी में निकालना है। इसलिए फतवों पर सवाल खड़ा करना ज्ञान की कमी है।
देवबंद धार्मिक नाम नहीं जब चाहें बदल दें: वाजदी
अरबी के प्रसिद्ध विद्वान मौलाना नदीमुलवाजदी का कहना है कि देवबंद का नाम बदलने से कोई आपत्ति नहीं है। क्योंकि देवबंद कोई धार्मिक नाम नहीं है। इसलिए जब चाहें इसका नाम बदल दें। जहां तक दारुल उलूम देवबंद का मसला है तो नाम बदलने से उस पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। वह आज भी दारुल उलूम के नाम से जाना जाता है और कल भी इसी नाम से जाना जाएगा।
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