फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

देवबंदी उलमा बोले,  'वसीम रिजवी तय नहीं करेंगे, दारुल उलूम से क्या फतवा जारी हो' 

Sat, 17 Nov 2018 03:23 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
विज्ञापन
मेरठ न्यूज
विज्ञापन

देवबंद का नाम बदलने और फतवों को लेकर उत्तर प्रदेश शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन सैय्यद वसीम रिजवी के बयान पर उलमा का दो टूक कहना है कि दारुल उलूम क्या जारी करता है क्या नहीं, इसके जिम्मेदार रिजवी नहीं है। सही और गलत की जिम्मेदारी प्रबंध तंत्र की है। जहां तक देवबंद का नाम बदले जाने का मसला तो यह कोई धार्मिक नाम नहीं है। इसलिए इसको बदले जाने पर कोई आपत्ति नहीं है।       

विज्ञापन


आपत्ति है तो दारुल उलूम आकर जिम्मेदारों से बात करें : अहमद   
मजलिस इत्तेहाद ए मिल्लत के प्रदेश अध्यक्ष मुफ्ती अहमद गौड़ का कहना है कि वसीम रिजवी को बयान देने से पहले देवबंद के इतिहास के बारे में जानकारी कर लेनी चाहिए। दारुल उलूम और देवबंद ने जंग-ए-आजादी की लड़ाई लड़ी। इसलिए इस पर और इसकी विचारधारा को शक के दायरे में नहीं लाया जा सकता। दारुल उलूम पूरी पारदर्शिता के साथ काम करता है।

यही वजह है कि जरूरत पड़ने पर बहुत से सरकारी संस्थान दारुल उलूम की मदद लेते हैं। कभी कोई शक वाली बात सामने आई भी तो हमेशा दारुल उलूम ने सहयोग किया और हर बार उसका दामन पाक साफ मिला। संस्था के वजूद में आने के बाद से आज तक इस पर कभी अंगुली उठाने की गुंजाइश ही नहीं मिली। जहां तक यहां से जारी होने वाले फतवों का सवाल है, तो वह वसीम रिजवी तय नहीं करेंगे कि मुफ्ती क्या जारी करें क्या नहीं। 

विज्ञापन
विज्ञापन

सवाल पूछने वालों के ही जवाब देते हैं मुफ्ती: मुजम्मिल     
जामिया तुश शेख हुसैन अहमद अल मदनी के मोहतमिम मौलाना मुजम्मिल अली  का कहना है कि दारुल उलूम स्थापना के समय से अपनी डगर पर कायम है और आगे भी रहेगा। दारुल उलूम में जो लोग सवाल लेकर इस्लामी रहनुमाई के लिए आते हैं, मुफ्ती केवल उसी का जवाब कुरआन और हदीस की रोशनी में देते हैं। मुफ्ती खुद से कोई फतवा जारी नहीं करते हैं। उनका मकसद केवल लोगों की समस्याओं का समाधान दीन और इस्लाम की रोशनी में निकालना है। इसलिए फतवों पर सवाल खड़ा करना ज्ञान की कमी है।
    
देवबंद धार्मिक नाम नहीं जब चाहें बदल दें: वाजदी      
अरबी के प्रसिद्ध विद्वान मौलाना नदीमुलवाजदी का कहना है कि देवबंद का नाम बदलने से कोई आपत्ति नहीं है। क्योंकि देवबंद कोई धार्मिक नाम नहीं है। इसलिए जब चाहें इसका नाम बदल दें। जहां तक दारुल उलूम देवबंद का मसला है तो नाम बदलने से उस पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। वह आज भी दारुल उलूम के नाम से जाना जाता है और कल भी इसी नाम से जाना जाएगा।

शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें

https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें