कैलाश पर्वत मंदिर पर पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद
कैलाश पर्वत दिगंबर जैन मंदिर में 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ में श्रद्धालुओं ने की पूजा
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। कस्बे के कैलाश पर्वत दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ के पंद्रहवें दिन श्रद्धा और भक्ति का विशेष वातावरण रहा।इस अवसर पर 108 भाव भूषण महाराज ने श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन का संदेश दिया। अपने मंगल प्रवचन में उन्होंने कहा कि आत्मोन्नति के मार्ग पर चलने के लिए मोह रूपी बोझ का त्याग अनिवार्य है। त्याग, संयम और साधना ही आत्मकल्याण का सच्चा मार्ग है।
मनुष्य यदि जीवन में आध्यात्मिक ऊंचाइयों को पाना चाहता है तो उसे मोह, माया और आसक्ति जैसे मानसिक बोझ को छोड़ना होगा। भौतिक सुख-सुविधाएं क्षणिक हैं, जबकि आत्मिक शांति स्थायी है। जब तक मनुष्य सांसारिक आकर्षणों में उलझा रहेगा, तब तक सच्चे सुख का अनुभव नहीं कर सकता। कार्यक्रम का शुभारंभ विधानाचार्य सौरभ शास्त्री ने मांगलिक मंत्रोच्चार के साथ किया।
स्वर्ण कलश प्राप्ति का सौभाग्य डॉ. सुधीर जैन को मिला। शांतिधारा रवीन जैन एवं लोकेश जैन ने की। दीप प्रज्वलन दीप्ति जैन व निकिता जैन ने किया। सुनीता दीदी ने विश्व के समस्त जीवों के कल्याण की मंगल भावना के साथ शांतिधारा का वाचन किया।
देव-शास्त्र-गुरु पूजन एवं आदिनाथ भगवान की पूजा के उपरांत सभी तीर्थंकरों को 48 अर्घ्य समर्पित कर भक्तामर विधान का शुभारंभ हुआ। 301 परिवारों के सहयोग से आयोजित विधान में देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं ने भाग लिया। भजन संध्या में आभा जैन व शिवानी जैन ने मधुर प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम के अंत में पंच परमेष्ठी एवं आदिनाथ भगवान की आरती हुई। आयोजन की सफलता में क्षेत्रीय पदाधिकारियों व जैन समाज का विशेष सहयोग रहा।
कैलाश पर्वत मंदिर पर पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद