संचय नहीं, त्याग बनाता है मनुष्य को धनवान : मुनि सौम्य सागर
हस्तिनापुर। श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर में चल रहे 40 दिवसीय श्री शांतिनाथ महामंडल विधान के 26वें दिन 360 परिवारों ने विधान की मांगलिक क्रियाओं में सहभागिता की। मुनि 108 सौम्य सागर महाराज ने कहा कि संचय वृत्ति पाप की ओर ले जाती है मनुष्य को सदैव दान व त्याग की भावना अपनानी चाहिए। औषधि दान, शास्त्र दान, अभय दान और आहार दान को उन्होंने श्रेष्ठ त्याग बताया।
उन्होंने कहा कि संचय वृत्ति पाप की ओर ले जाती है और मनुष्य को सदैव दान व त्याग की भावना अपनानी चाहिए। औषधि दान, शास्त्र दान, अभय दान और आहार दान को उन्होंने श्रेष्ठ त्याग बताया। उन्होंने कहा कि वृक्ष कार्बन डाइऑक्साइड ग्रहण कर मानव को ऑक्सीजन प्रदान करते हैं और समय आने पर अपने पत्तों का भी त्याग कर देते हैं। इसी प्रकार मनुष्य को भी केवल संग्रह की प्रवृत्ति नहीं अपनानी चाहिए। आयोजन को सफल बनाने में क्षेत्रीय अध्यक्ष जीवेंद्र कुमार जैन, महामंत्री मुकेश कुमार जैन सर्राफ, कोषाध्यक्ष राजेंद्र कुमार जैन, महाप्रबंधक मुकेश जैन सहित अनेक पदाधिकारियों और समाजसेवियों का सहयोग रहा।
संगीतमय आरती, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मन मोहा
कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य वेदी पर भगवान जिनेंद्र के अभिषेक से हुई। श्रद्धालुओं ने मंत्रोच्चार के साथ जलाभिषेक कर धर्मलाभ प्राप्त किया। इसके बाद त्रिमूर्ति जिनालय में मंगलाचरण, दिग्वंदन, पात्र शुद्धि और जल शुद्धि की विधियों के साथ विशेष पूजन-अर्चना संपन्न हुई। संगीतमय आरती, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और भक्ति नृत्य भी आयोजित किए गए। शांतिधारा की बोली में देहरादून निवासी नमय जैन, सरिता जैन, गौरव जैन और विनय जैन को शांतिधारा करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। बाल ब्रह्मचारिणी सुनीता दीदी ने महामंत्रों के वाचन के साथ शांतिधारा संपन्न कराई। ऋषभ जैन और राधिका जैन सहित अनेक परिवारों ने धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। पुरस्कार वितरण नरेंद्र जैन और कुसुमलता जैन परिवार की ओर से किया गया।
प्राचीन दिगंबर जैन बड़े मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद