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त्याग ही जीवन का सच्चा वैभव : विमर्श सागर

Sat, 28 Feb 2026 08:22 PM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
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प्राचीन दिगंबर जैन बड़े मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद
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कैलाश पर्वत दिगंबर जैन मंदिर में भक्तामर विधान एवं पाठ का 31वां दिन
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त्याग ही जीवन का सच्चा वैभव


हस्तिनापुर। कस्बे के कैलाश पर्वत दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ के 31वें दिन कई विधान हुए। विधानाचार्य सौरभ शास्त्री ने मांगलिक मंत्रों से धार्मिक क्रियाओं से पूजा कराई। विधान के मध्य 108 विमर्श सागर मुनिराज ने अपने मंगल उद्बोधन में कहा कि दान और त्याग में बहुत अंतर है। दान हमेशा अच्छी वस्तु का होता है। त्याग बुरी वस्तु का। दान दूसरों के उपकार के लिए होता है पर त्याग अपने उपकार के लिए। दान के बाद एकत्र करने का भाव होता है लेकिन त्याग में ऐसा नहीं है। दान दो के बीच की क्रिया होती है पर त्याग स्वयं के द्वारा स्वयं के लिए होती है। दान वैभव का होग, त्याग विकारों का।
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स्वर्ण कलश से अभिषेक करने का सौभाग्य अरुण जैन, मुकेश जैन, राकेश, अनिल जैन को प्राप्त हुआ। शांतिधारा सुरेश, दीपक जैन ने की। दीप प्रज्ज्वलन संगीता जैन, युवांश जैन, प्रतिष्ठा जैन ने किया। सुनीता दीदी ने शांतिधरा का उच्चारण किया। आदिनाथ भगवान के पूजन के बाद भक्तामर विधान का शुभारंभ हुआ। विधान का विसर्जन कुसुमलता जैन ने किया। पंच परमेष्ठी की आरती का दीप प्रज्ज्वलन वीरेंद्र कुमार जैन ने किया। आदिनाथ भगवान की आरती का प्रज्ज्वलन मुकेश जैन ने किया। कार्यक्रम में अध्यक्ष जीवेंद्र जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेन्द्र जैन, सुशील जैन, राकेश जैन, रोहित जैन, भूषण स्वरूप, मुकेश जैन, प्रमोद जैन का विशेष सहयोग रहा।

प्राचीन दिगंबर जैन बड़े मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद

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