शहर स्मार्ट सिटी में कैसे शामिल होगा। जब शहर के मुख्य मार्ग ही गड्ढों में तब्दील है। कंपनी बाग से लेकर मोदीपुरम फ्लाई ओवर तक रुड़की रोड की हालात खराब है। यहां की सड़क पूरी तरह गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। इसके चलते स्थानीय लोग खासे परेशान हैं। दुपहिया वाहन चालक तो अक्सर गड्ढों में फंसकर चुटहिल हो रहे हैं। कंपनी बाग से मोदीपुरम फ्लाई ओवर तक इस मार्ग को बनाने में एमडीए ने करीब डेढ़ साल पहले साढ़े चार करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। लेकिन पानी उचित निकासी न होने के कारण सड़क एक साल भी नहीं चल पाई। हर बार मार्ग को सही कराने के नाम पर सिर्फ पैचवर्क करा दिया जाता है। एक सप्ताह में फिर वही हाल हो जाता है। गड्ढों के कारण मार्ग पर दुर्घटनाओं का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है।
इन स्थानों पर खतरनाक गड्ढे
- राजन कुंज कालोनी के सामने
- सोफीपुर गांव के सामने जगह-जगह।
-राज मंदिर मंडप के पास
- मेजर हरीशचंद्र अपार्टमेंट के सामने
-डौरली गेट के सामने
-छठी वाहिनी पीएसी के पास
छह माह से दिक्कत
पिछले छह मार्ग से इस मार्ग पर चलना दूभर हो रहा है। जगह जगह गड्ढे हो गए हैं, लेकिन अभी तक मार्ग को सहीं नहीं कराया गया है। इस कारण से आए दिन दुपहिया वाहन चालक चुटहिल हो रहे हैं। मोदीपुरम का यह मुख्य मार्ग है। इसे जल्द ठीक होना चाहिए।
डॉ. आर के सिंह, प्रधानाचार्य डीएमजी इंटर कॉलेज
मेरठ जाने के लिए रुड़की रोड मुख्य मार्ग है, यहां पर जगह-जगह गड्ढे हो गए हैं। इसके कारण धूल उड़ती है। साथ ही हादसे भी होते रहते हैं। डेढ़ साल पहले यह मार्ग बना था। कुछ समय ठीक रहा। फिर से खराब हो गया। बरसात के बाद से इस मार्ग की हालत बदतर है। अभी तक ठीक नहीं कराया गया है।
व्यापारी अनिल चौधरी
जल्द कराएं मार्ग निर्माण
शहर को स्मार्ट सिटी में शामिल करने की बात की जा रही है, लेकिन शहर की सड़के तो अभी भी गड्ढों में तब्दील हैं। जब मार्ग ही खस्ता रहेंगे तो फिर शहर स्मार्ट सिटी कैसे बनेगा। एमडीए और भाजपाइयों को इस पर ध्यान देना चाहिए। इस मार्ग को अति शीघ्र बनवाएं।
कैैप्टन जेपीएस राणा, अध्यक्ष सीनियर सिटीजन वेलफेयर एसोसिएशन
शिकायत के बाद भी सुध नहीं
मार्ग की हालत खराब है। रुडकी रोड पर दर्जनों कालोनी हैं। पीएसी की यूनिट और स्कूल भी हैं। लेकिन मार्ग की हालत इतनी खराब है कि लोगों का चलना मुश्किल है। इसका असर व्यापार पर भी दिखाई दे रहा है। मार्ग को बनवाने के लिए शिकायत भी की जा चुकी है। लेकिन को ध्यान नहीं दे रहा।
अशोक शर्मा, व्यापारी