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आरएसएस समागम के होर्डिंग पर उबले वाल्मीकि समाज के लोग  

Mon, 19 Feb 2018 12:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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25 फरवरी को मेरठ में होने जा रहा आरएसएस का राष्ट्रोदय समागम विवादों के घेरे में आ गया है। इस बाबत शहर में होर्डिंग, यूनिपोल लगाए गए हैं। इसमें महर्षि वाल्मीकि, चोखामैला और संत रविदास को अस्पृश्य लिखने का विरोध शुरू हो गया है। वाल्मीकि समाज के लोगों ने एलान कर दिया है कि पंचायत कर इसका विरोध होगा। महर्षि वाल्मीकि जैसे ऋषियों को अस्पृश्य बताना किसी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।  
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राष्ट्रीय स्वयं सेवक का समागम जागृति विहार एक्सटेंशन में एक बड़े मैदान में प्रस्तावित है। इसकी तैयारियां जोरशोर से चल रही हैं। बताया जा रहा है कि इस कार्यक्रम में तीन मंडलों और 14 जिलों के तीन लाख से भी ज्यादा स्वयंसेवक शिरकत करेंगे। यही कारण है कि पूरा अमला इस कार्यक्रम के लिए जुटा है। सुरक्षा के लिहाज से पुलिस प्रशासन भी मशक्कत कर रहा है। उधर, रात के समय रोजाना एक जिले के सत्तर कार्यकर्ता मैदान में लाइन और चूने से ब्लॉक बनाने का काम कर रहे हैं ताकि स्वयंसेवक अनुशासित तरीके से इसमें खड़े हो सकें। 
पूरे शहर में इस कार्यक्रम को लेकर होर्डिंग और यूनिपोल लगाए गए हैं। इन्हीं पर अब विवाद खड़ा हो गया है। वाल्मीकि समाज के लोगों का आरोप है कि होर्डिंग तथा यूनिपोल पर जिस तरह के शब्द महर्षि वाल्मीकि, चोखामैला तथा संत रविदास के लिए लिखे गए हैं, वह किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। इसका विरोध किया जाएगा। उन्होंने कि इन होर्डिंग को हटाने या संशोधित करने की मांग की है।
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ये लाइनें लिखी हैं होर्डिंग पर
होर्डिंग पर ऊपर दाई तरफ बाबा साहब भीमराव अंबेडकर का चित्र अंकित है। सबसे ऊपर लिखा गया है, ‘हिंदू धर्म की जैसे प्रतिष्ठा वशिष्ठ जैसे ब्राह्मण, कृष्ण जैसे क्षत्रिय, हर्ष जैसे वैश्य और तुकाराम जैसे शूद्र ने की है, वैसी ही वाल्मीकि, चोखामैला और रविदार जैसे अस्पृश्यों ने भी की है’।
संघ के पास विचारधारा नहीं
सफाई कर्मचारी नेता कैलाश चंदोला का कहना है कि संघ के पास दलितों के लिए कोई विचारधारा नहीं है। हमारे उत्थान का कोई रास्ता नहीं है। वाल्मीकि जयंती की छुट्टी तक खत्म कर दी गयी। इनकी करनी और कथनी में अंतर है। अब होर्डिंग पर संतों को अस्पृश्य (अछूत) लिख दिया है। यह बर्दाश्त  नहीं होगा। इसका विरोध किया जाएगा।
संघ मानसिकता बदले  
वाल्मीकि समाज के नेता सुंदर लाल भुरंडा का कहना है कि अति दलितों की अनदेखी की जा रही है। संघ को अपनी मानसिकता बदलनी होगी। कम से कम हमारे पूर्वजों, संतों के नामों के साथ गलत शब्दों का प्रयोग करके अपमानित तो न किया जाए। राष्ट्रोदय के लिए लगाए गए बोर्ड से शूद्र और अछूत जैसे शब्दों को हटाया जाना चाहिए। यदि ऐसा नहीं किया तो विरोध होगा।
यह सीधे-सीधे अपमान
सफाई कर्मचारी नेता विनेश मनोठिया के अनुसार यह सीधे-सीधे वाल्मीकि समाज का अपमान है। इसके विरोध में समाज की सोमवार को पंचायत बुलायी जाएगी। जिन लोगों ने महर्षि वाल्मीकि को अस्पृश्य कहा है, उन लोगों की मानसिकता का परिचय हो रहा है। उन्हें समझना चाहिए कि महापुरुष सभी का उत्थान करते हैं। इसके लिए इन लोगों को माफी चाहिए।
विरोध का बहाना चाहिए
समाज में भेदभाव तो है ही जिसे मिटाना है। यदि ऐसा नहीं है तो आरक्षण क्यों चल रहा है। जो पंक्तियां लिखी गई हैं वह बाबा साहब अंबेडकर द्वारा उद्घत की गई थी। कुछ लोगों को तो विरोध करने का बहाना चाहिए। हम तो सभी को जोड़ने की बात कर रहे हैं। -अजय मित्तल, प्रांत प्रचारक आरएसएस 
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