बंगला नंबर 210 बी के आरआर मॉल की आठ दुकानों के कब्जे का मामला शुक्रवार को गरमा गया। दुकानों को गिराने के लिए कैंट बोर्ड के अफसर, कर्मचारी और पुलिस-प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। कैंट बोर्ड के अफसरों को देखकर व्यापारी भड़क गए। नारेबाजी करते हुए दुकानों का मामला कोर्ट में बता दिया। व्यापारियों ने धमकी दे दी कि अगर उनको दुकानों से निकाला गया तो वे आत्मदाह कर लेंगे। हूटर बजाकर दूसरे व्यापारी बुला लिए। कुछ व्यापारियों ने कैंट बोर्ड के अफसरों पर टिप्पणी शुरू की तो वे चले गए। हंगामा बढ़ते देख कर्मचारी बिना कार्रवाई के लौट गए। एडीएम सिटी और एसपी सिटी ने कहा कि जब कैंट बोर्ड के अफसर ही मौके पर नहीं हैं तो कार्रवाई कैसे होगी।
कैंट बोर्ड ने 9 जुलाई 2016 को बंगला नंबर 210 बी के आरआर माल के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की थी। ध्वस्तीकरण के दौरान मलबे में दबकर चार लोगों की मौत हो गई थी। मौके पर ग्राउंड फ्लोर का हिस्सा रह गया था। बीते दिनों कैंट बोर्ड ने बिल्डिंग के मलबे को उठवा लिया था। मंगलवार को यहां पर ग्राउंड फ्लोर की आठ दुकानों की सील तोड़कर व्यापारियों ने सामान रखकर बोर्ड लगा दिए। इस मामले में सीईओ की तरफ से सदर बाजार थाने में तीन मुकदमे दर्ज कराए गए। सीईओ ने कार्रवाई के लिए डीएम-एसएसपी को पत्र भेजकर फोर्स मांगी थी, जिससे इस जगह से कब्जा हटवाया जा सके। कैंट बोर्ड ने हाईकोर्ट को भी अवगत कराया था कि बार-बार फोर्स मांगने के बाद भी पुलिस नहीं मिली जिसके चलते कुछ लोगों ने दुकानें खोल ली हैं। हाईकोर्ट ने अवमानना मानते हुए मुख्य सचिव के साथ ही डीएम और एसएसपी से जवाब मांग लिया।
सुबह से ही एकत्र होने लगे थे कर्मचारी
बृहस्पतिवार को इसको लेकर कैंट के अफसरों की डीएम-एसएसपी से बात हुई। शुक्रवार सुबह से ही कैंट बोर्ड में कर्मचारी एकत्र होने लगे। सदर बाजार थाने के अलावा लालकुर्ती पुलिस भी पहुंच गई। दोपहर एक बजे के करीब सिटी मजिस्ट्रेट, एएसपी सतपाल सिंह, सीओ पंकज सिंह और इंस्पेक्टर सदर बाजार प्रशांत कपिल और कैंट बोर्ड के सीनियर इंजीनियर पियूष गौतम कर्मचारियों के साथ मौके पर पहुंच गए। पुलिस और कैंट की टीम को देखते ही व्यापारियों ने नारेबाजी शुरू कर दी। कैंट अफसरों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए दुकानों का मामला कोर्ट में होने की बात करने लगे। आबूलेन व्यापार संघ के व्यापारी राजीव बंसल, अमित बंसल, सरदार राजबीर सिंह, सुनील दुआ, अमित सिंघल, रघुवीर सिंह, नरेश परूती और पप्पू गुर्जर के अलावा संयुक्त व्यापार संघ के अध्यक्ष नवीन गुप्ता भी दुकानदारों के पक्ष में एकजुट हो गए। मामला गरमाने पर एसपी सिटी मान सिंह चौहान और एडीएम सिटी मुकेश चंद्र भी पहुंच गए। एसपी सिटी ने व्यापारियों से कहा कि कोर्ट का आदेश है, ऐसे में कार्रवाई होने दें। अमित बंसल और उनके भाई राजीव बंसल इनमें से तीन दुकानों को अपनी बता रहे हैं। इन्होंने स्पार्की नाम के बोर्ड दुकानों पर लगा दिए हैं। एक दुकानदार रघुवीर सिंह ओबेराय इन्वर्टर वाले हैं। उन्होंने अफसरों को 2006 में डाले गए कोर्ट में केस की कॉपी दे दी। व्यापारियों का कहना था कि ये मामला अभी तक कोर्ट में लंबित है, ऐसे में इन दुकानों का मॉल के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से कोई मतलब नहीं है। इस पर एसपी सिटी ने कैंट अफसरों से अपने कागजात दिखाने को कहा। सीनियर इंजीनियर पियूष गौतम और कैंट बोर्ड के प्रवक्ता एमए जफर ने बताया कि साल 2014 में हाईकोर्ट ने सभी रजिस्ट्री रद करते हुए मॉल के ध्वस्तीकरण के आदेश दिए थे। इस निर्णय पर सुप्रीमकोर्ट ने भी मुहर लगा दी थी।
अभद्र व्यवहार पर चले गए कैंट के अफसर
एडीएम सिटी और एसपी सिटी दोनों पक्षों से बात कर रहे थे कि कुछ व्यापारियों ने अफसरों के साथ अभद्र व्यवहार कर दिया। अपशब्द बोले जाने पर अफसर वहां से चले गए। एसपी सिटी ने व्यापारियों से कहा कि इस तरह से बात करने की जरूरत नहीं है। न्यायिक कार्रवाई करें और मॉल हादसे में चार मौत के मामले में वे भी जल्द चार्जशीट भिजवा रहे हैं। काफी देर तक चले हंगामे के बाद एडीएम ने कैंट बोर्ड के सीईओ राजीव श्रीवास्तव से बात कर उनको भी मौके पर आने के लिए कहा। कुछ देर बाद पुलिस और प्रशासनिक अफसर ये कहकर निकल गए कि जब कैंट के अफसर ही नहीं हैं तो हम क्या करें।
बोतल में ले रखा था पेट्रोल
व्यापारियों ने एक बोतल में पेट्रोल भी लिया हुआ था। इस पर एएसपी सतपाल सिंह ने उसे तुरंत कब्जे में कराकर व्यापारियों से कहा कि बात करनी है तो सही से करें। इस तरह से कोई गलती नहीं होनी चाहिए।
कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई
कोर्ट की अवमानना का मामला है। पुलिस-प्रशासन को इस बारे में अवगत कराया जा चुका है। कोर्ट जैसा आदेश देगा, वैसे ही कार्रवाई की जाएगी। - एमए जफर, प्रवक्ता कैंट बोर्ड