अमानगढ़ में बढ़ रही रॉयल बंगाल टाइगर की दहाड़
बिजनौर। अमानगढ़ टाइगर रिजर्व में रॉयल बंगाल टाइगर की दहाड़ पहले से ज्यादा तेज हो रही है। यहां बाघों की संख्या में इजाफा हो रहा है। इस साल वन विभाग के कर्मचारियों को कई बार बाघिन के साथ शावक भी दिखे हैं। इससे तय है कि बाघों की संख्या में वृद्धि हुई है।
भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में से एक है, जहां बाघ और बब्बर शेर का सहअस्तित्व है। हाल ही में गुजरात के गिर जंगल का रकबा और शेरों की आबादी दोनों बढ़ी हैं। इसी तरह की अच्छी खबरें अमानगढ़ टाइगर रिजर्व से भी सामने आ रही हैं। अमानगढ़ में पहली बार साल 2009 में बाघों की गणना हुई थी, तब यहां 12 बाघ मिले थे। पिछले साल वर्ल्ड वाइल्ड फंड (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) द्वारा ट्रैप कैमरे से की गई गिनती में बाघों की संख्या बढ़कर 22 हो गई लेकिन इनमें कोई शावक नहीं था। इस साल एक बार फिर टाइगर रिजर्व में ट्रैप कैमरे लगाकर बाघों की गणना की गई है। इसमें बाघिन को अपने दो शावकों के साथ घूमते हुए देखा गया है। हालांकि इसके आंकड़े अभी सार्वजनिक नहीं किए हैं। मगर उम्मीद है कि बाघ बढ़े हैं।
..तभी तो गुलदार भी छोड़ रहे वन
अमानगढ़ में बाघों की बढ़ती संख्या सुखद संदेश दे रही है। बाघ अमानगढ़ का सबसे बड़ा शिकारी है। बाघ, गुलदार को आसानी से मार देता है। हाल ही में गुलदारों के वन को छोड़कर गांवों के आसपास देखे जाने के मामले बढ़े हैं। बाघ की संख्या जब बढ़ती है तो गुलदार उनके इलाके को छोड़कर खेतों की ओर चले जाते हैं।
मां सिखाती है शिकार करना
बाघ कभी जोड़े में नहीं रहता है। वह केवल प्रणय के समय ही कुछ समय के लिए साथ रहते हैं। मादा ही शावकों को पालती है और उन्हें शिकार करना सिखाती है। शावक अपने जीवन का पहला शिकार अपनी मां के साथ मिलकर ही करते हैं।
..........
अमानगढ़ में लगाए ट्रैप कैमरों में बाघ की काफी तस्वीरें कैद हुई हैं। कई बार कर्मचारियों को बाघिन के साथ शावक भी दिखे हैं। हालांकि वर्ल्ड वाइल्ड फंड की ओर से अभी तक बाघों की संख्या की घोषणा नहीं की गई है।
डा. एम सेम्मारन, डीएफओ