कांवड़ यात्रा के चलते बृहस्पतिवार को भैसाली बस अड्डा अस्थायी रूप से सोहराबगेट बस अड्डे पर शिफ्ट कर दिया गया। रूट डायवर्जन होने से न केवल यात्रियों के गंतव्य की दूरी बढ़ गई बल्कि जेब पर बढ़े किराये का भार भी बढ़ गया। डायवर्जन के कारण रेलवे की तरफ मुड़े यात्रियों को ट्रेनों में चल रही भीड़ और देरी से यहां भी राहत नहीं मिल पा रही है।
कांवड़ यात्रा के दौरान दिल्ली-हरिद्वार हाईवे पर भारी बसों का संचालन बंद हो गया है। ऐसे में हर हाल की तरह भैसाली बस अड्डे को सोहराबगेट शिफ्ट कर दिया गया है। सुबह से लेकर दोपहर तक भैसाली डिपो से संचालित होने वाले मेरठ व भैसाली डिपो की सभी बसें सोहराबगेट पहुंच गई। बाहरी राज्यों में आई बसें जानकारी के अभाव में भैसाली बस अड्डे पहुंची तो इन्हें भी पुलिस ने सोहराबगेट भेज दिया। बस अड्डा शिफ्ट होने के चलते दिल्ली, गाजियाबाद, नोेएडा, मोहननगर, कौशांबी आदि जाने वाले यात्रियों को वाया किठौर-हापुड़ भेजा गया। इससे यात्रियों को निर्धारित रूट की अपेक्षा 20 से 25 किलोमीटर का अतिरिक्त सफर करना पड़ा। निर्धारित किराये से 20 से 50 फीसदी तक अधिक किराया भी अदा करना पड़ा।
मेरठ-पौढ़ी मार्ग से मुजफ्फरनगर, हरिद्वार की बसों का संचालन
हाइवे बंद होने से मुजफ्फरनगर, हरिद्वार, देहरादून और ऋषिकेश आदि जाने वाली बसों का संचालन मेरठ-पौढ़ी मार्ग से शुरू हो गया। मुजफ्फरनगर जाने वाली बसों को वाया मीरापुर और हरिद्वार, ऋषिकेश आदि जाने वाली बसों को वाया बिजनौर संचालित किया जा रहा है। इस रूट की दूरी भी बढ़ने से यात्रियों की जेब पर बढ़े किराये का बोझ पड़ रहा है।
भैसाली अड्डे पर दोपहर तक पहुंचती रहीं बसें
जानकारी के अभाव और पुलिस की लापरवाही के चलते बाहर गई रोडवेज बसें भैसाली बस अड्डे पर जाने के लिए शहर के अंदर घुसती रहीं। इससे बिजली बंबा बाईपास से लेकर मेट्रो प्लाजा, ईदगाह आदि के सामने कई बार जाम लगा। कांवड़ व्यवस्था में लगे पुलिस कर्मियों ने भारी वाहनों को शहर के अंदर जाने से रोकने की जहमत नहीं उठाई।