हर महीने बसों की धुलाई पर लाखों लीटर पानी खर्च करने वाला रोडवेज अब पानी बचाने की ओर अग्रसर हो गया है। दिल्ली रोड स्थित सेंट्रल वर्कशाप में लगाए गए वाटर रिसाइकिल प्लांट और ऑटोमेटिक बस वाशिंग प्लांट के जरिये हर माह 10 लाख लीटर पानी बचाया जा सकेगा। प्लांट लगाने में 22 लाख रुपये खर्च हुए हैं। करीब 350 लीटर पानी में धुलने वाली बस अब मात्र 25 लीटर पानी में धुल रही है। इतना ही नहीं इस पानी को रिसाइकिल करके दोबारा प्रयोग किया जा रहा है।
दिल्ली रोड स्थित सेंट्रल वर्कशाप में रोजाना करीब 100 बसों की धुलाई की जाती है। सीधे सबमर्सिबल पाइप से होने वाली इस धुलाई में प्रति बस करीब 350 लीटर पानी खर्च हो रहा था। गत 22 मार्च को वर्ल्ड वाटर डे के अवसर पर अमर उजाला माय सिटी ने रोडवेज द्वारा की जा रही पानी की बर्बादी की खबर को प्रमुखता से छापा था। इसके बाद चेते विभाग ने तीन माह के अंदर ही न केवल ऑटोमेटिक बस वाशिंग मशीन प्लांट लगवा लिया बल्कि वाटर रिसाइकिल प्लांट भी स्थापित करा लिया है।
रुकेगी पानी की बर्बादी
अभी तक सेंट्रल वर्कशाप में 100 बसों पर 350 लीटर पानी प्रति बस के हिसाब से 35 हजार लीटर पानी खर्च हो रहा था। महीने में इन बसों पर 10 लाख 50 हजार लीटर पानी बर्बाद होकर गटर में बहाया जा रहा था। लेकिन ऑटोमेटिक बस वाशिंग मशीन प्लांट के जरिये अब 100 बसों पर रोजाना 2500 लीटर पानी ही खर्च किया जा रहा है। महीने में 75 हजार लीटर पानी में ही 3000 बसों की धुलाई हो रही है। बसों की सफाई पर खर्च पानी का दोबारा से इस्तेमाल कर इस पहल को और भी ज्यादा कारगर बना दिया है।
सभी वर्कशाप में लग चुके प्लांट
रोडवेज की सेंट्रल वर्कशाप के अलावा सोहराबगेट, बड़ौत और गढ़मुक्तेश्वर वर्कशाप में भी ऑटोमेटिक बस वाशिंग प्लांट के जरिये पानी की बचत की जा रही है। रोडवेज की यह पहल दूसरे विभागों के लिए प्रेरणादायक हो सकती है। आने वाली पीढ़ी को बचाने के लिए सभी को जल बचाना होगा।
क्या बोले अधिकारी
विभाग पानी बचाने के प्रति गंभीर है। बसो की सीधी धुलाई में काफी पानी खर्च हो रहा था। ऑटोमेटिक वाशिंग प्लांट में 25 लीटर पानी में ही बस की धुलाई आसानी से हो जाती है। वाटर रिसाइकिल प्लांट गंदे पानी को फिर से इस्तेमाल करने योग्य कर देता है।
एसएल शर्मा, सेवा प्रबंधक रोडवेज मेरठ रीजन