मेरठ में यदि समय से मेट्रो ट्रेन के प्रोजेक्ट पर काम शुरू करना है, तो एक साल के भीतर हर सूरत में भैसाली बस अड्डे को शहर से बाहर शिफ्ट करना होगा। मेट्रो की डीपीआर में इसकी शिफ्टिंग को शामिल नहीं किया गया है और कहा है कि यह प्रशासन तथा एमडीए का काम है। वैसे भी यह अड्डा शहर की यातायात व्यवस्था के लिए नासूर बना हुआ है और इसे बाहर करना जरूरी है।
कॉरिडोर वन में बनेगा भैसाली स्टेशन
मेट्रो के कॉरिडोर वन में भैसाली स्टेशन डीपीआर में प्रस्तावित किया गया है। इसके लिए पार्किंग आदि के लिए जमीन की उपलब्धता के रूप में भैसाली बस अड्डे की जमीन को शामिल किया गया है। यानी यहां यदि स्टेशन बनाना है तो भैसाली बस अड्डे को जल्द ही बाहर ले जाना होगा।
समय कम, जल्दी बस अड्डा करो बाहर
अगले साल से मेट्रो के प्रोजेक्ट पर काम शुरू करने का दावा मेट्रो की डीपीआर में किया गया है। राइट्स ने इसे तैयार किया है। स्थानीय अधिकारियों के साथ मुख्य रूप से लखनऊ मेट्रो रेल कारपोरेशन की टीम इसकी मॉनिटरिंग कर रही है। इस टीम ने फाइनल डीपीआर के लिए 27 मई को बैठक रखी है। डीपीआर में स्पष्ट कहा है कि भैसाली अड्डे को शिफ्ट करना डीपीआर का हिस्सा नहीं है। इसके लिए अलग से प्लान बनाकर काम करना होगा। दरअसल इस काम को कठिन माना जा रहा है। यह अड्डा दिल्ली रोड पर रोजाना ही जाम का करण बनता है। इस लिए इसे यहां से हटाने की मांग उठती रही है।
कमेटी को करना होगा काम
कमिश्नर की अध्यक्षता में बस अड्डों को बाहर करने के लिए कमेटी बनी है, जिसमें पीडब्लूडी, निगम और एमडीए के अधिकारी शामिल हैं। यह टीम विभिन्न स्थानों पर बस अड्डे के लिए जमीन देख चुकी है। खास तौर पर दिल्ली रोड स्थित संजय वन के आगे एक जमीन को फाइनल करने पर जोर है। इस कमेटी को जल्द ही इसकी रिपोर्ट देनी होगी, ताकि समय से बस अड्डे को शिफ्ट किया जा सके। डीपीआर में स्पष्ट है कि यदि समय से भैसाली अड्डे को शिफ्ट कर इसकी जमीन नहीं दी गई, तो काम नहीं हो सकेगा।
रामलीला मैदान की जमीन पर भी विवाद
मेट्रो के ब्रह्मपुरी स्टेशन के लिए रामलीला ग्राउंड को उपलब्ध जमीन कहा जा रहा है। इस पर भी विवाद शुरू हो गया है। रामलीला कमेटी के पदाधिकारियों ने विरोध शुरू कर दिया है। कहा है कि यदि यह जमीन स्टेशन के लिए चली जाएगी, तो रामलीला कहां होगी?
टीपीनगर को भी हटाना होगा
मेट्रो का काम 2017 में शुरू होगा, तो यातायात व्यवस्था खास तौर पर दिल्ली रोड पूरी तरह बाधित होगी। यहां वैसे ही टीपी नगर के कारण जाम की स्थिति रहती है। आबादी के बीच टीपी नगर शहर के यातायात सिस्टम को पलीता लगा रहा है। एमडीए इसे पांचली में शिफ्ट करने की योजना तो बना रहा है, पर अभी काम आगे नहीं बढ़ पाया है। ऐसे में मेट्रो का काम शुरू करने से पहले टीपी नगर को भी शिफ्ट करना होगा। यदि ऐसा नहीं हो पाया तो शहर में यातायात ठप हो जाएगा।
27 को फाइनल होगी डीपीआर
कमिश्नर ने कहा है कि 27 मई को बैठक कर डीपीआर फाइनल कर दी जाए। एलएमआरसी की टीम तो बुधवार को ही चली गई, पर एक सप्ताह अब स्थानीय स्तर पर कवायद होगी। एमडीए अधिकारी, राइट्स अधिकारी, नगर निगम तथा सैन्य अधिकारियों के सामने तथ्य पेश करेेंगे। निगम से जमीन का रिकार्ड भी देखा जाएगा।
कुछ तथ्य
- 30 किमी से घटकर लगभग 27 किमी का बचा मेट्रो का ट्रैक
- सरकारी या निजी जमीन की खरीद की रकम भी बनेगी डीपीआर का हिस्सा
- अतुल माहेश्वरी सेतु के बराबर ही एलीवेटेड दौड़ेगी मेट्रो
- कॉरिडोर वन में परतापुर थाने से एलीवेटेड शुरू होगा ट्रैक, बागपत रोड क्रासिंग पर होगा अंडरग्राउंड और गांधी बाग पर फिर से पल्लवपुरम तक एलीवेटेड
- दूसरा कॉरिडोर रजबन बाजार से काली नदी तक ही पूरा एलीवेटेड
- एलीवेटेड ट्रैक बनाना पड़ता है सस्ता, अंडर ग्राउंड महंगा
यह है डीपीआर में ट्रेन चलने तक का प्लान
फाइनल डीपीआर - मई 2016
प्रदेश सरकार का अप्रूवल - जुलाई 2016
भारत सरकार का प्रारंभिक अप्रूवल - अक्टूबर 2016
अंतरिम बैठक - दिसंबर 2016
सिविल वर्क के लिए कमेटी का गठन- दिसंबर 2016
सिविल वर्क के लिए निविदा- जनवरी 2017
भारत सरकार की फाइनल अप्रूवल - मार्च 2017
प्राथमिकता के आधार पर सिविल वर्क का चयन- मार्च 2017
काम पूरा- मार्च 2022