बस अड्डों को शहर से बाहर करने के मामले में रोडवेज ने एनजीटी में हलफनामा दाखिल किया है। इसमें विभाग ने बसों द्वारा जाम नहीं लगने और प्रदूषण नहीं फैलने की बात कहते हुए बाहर जाने की स्थिति में 200 एकड़ जमीन की मांग की है।
सोमवार को हुई सुनवाई में वन एवं पर्यावरण विभाग, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण विभाग व केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण विभाग द्वारा जवाब दाखिल नहीं करने पर मामले की सुनवाई की तिथि 4 जुलाई मुकर्रर की है। विभागों को अपना जवाब 8 जून तक दाखिल करना होगा। आरटीआई एक्टिविस्ट लोकेश खुराना की रिट याचिका पर जाम और प्रदूषण का पर्याय बने रोडवेज बस अड्डों को शहर से बाहर करने पर एनजीटी ने रोडवेज, एमडीए, वन एवं पर्यावरण विभाग, उत्तर प्रदेश व केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण विभाग को नोटिस देकर जवाब मांगा था। एमडीए ने अपना जवाब पहले ही दाखिल कर दिया था। रोडवेज ने भी गत सप्ताह अपना जवाब दाखिल कर दिया। एनजीटी में दाखिल जवाब में रोडवेज आरएम एसके बनर्जी ने बताया कि भैसाली बस अड्डा 11 हजार 600 वर्ग मीटर व सोहराबगेट बस अड्डा 4900 वर्ग मीटर में संचालित हो रहा है। रीजन में वर्तमान में 491 बसे निगम की व 350 बसे अनुबंधित संचालित हो रही हैं। अनुबंधित बसों में से 16 बसें सीएनजी से संचालित हैं। बाकी सभी बसें बीएस थ्री मानक इंजन की हैं। इन बसों से वायु प्रदूषण नहीं होता है। बस अड्डों पर भी निकास व प्रवेश के अलग-अलग द्वार हैं और अड्डों से बसे नियमानुसार व टाइमटेबल के जरिये ही चलाई जाती हैं। इसके चलते कोई जाम नहीं लगता है। बस अड्डों को बाहर करने के लिए विभाग को 200 एकड़ जमीन की आवश्यकता है।