दिन निकलते ही महानगर की सड़कों की बोली लगनी शुरू हो जाती है। कहीं पर पांच तो कहीं 10 रुपये की पर्ची पर सड़क आठ घंटे के लिए बेची जा रही हैं। अवैध पार्किंग का गोरखधंधा शहर में 90 प्रतिशत स्थानों नगर निगम के अफसरों की मिलीभगत से चल रहा है। रोजाना करीब 50 हजार रुपये का फटका निगम के खजाने पर लग रहा है। इसका खुलासा सूरजकुंड पार्क के बाहर पार्किंग में अवैध वसूली से हो चुका है।
महानगर में अधिकतर नर्सिंग होम, कॉलेज, कॉम्पलैक्स, होटलों, बैंकों के बाहर सड़क पर ही वाहन पार्किँग चल रही हैं। जहां तीन-चार स्थानों पर ही नगर निगम ने ठेका छोड़ा हुआ है। जबकि 90 प्रतिशत स्थानों पर जनता से वाहन पार्किंग शुल्क के नाम पर बाहरी लोग वसूली कर रहे हैं। अवैध वसूली के खेल से नगर निगम प्रशासन और पुलिस पूरी तरह अंजान होने का नाटक कर रही हैं। नगर निगम द्वारा निर्धारित रेट के अनुसार दो पहिया वाहनों से पार्किंग शुल्क पांच रुपये वसूला जा सकता है।
यहां चल रही है अवैध पार्किँग
- गढ़ रोड पर युग नर्सिंग होम के बाहर, पश्चिमी कचहरी मार्ग पर होप नर्सिंग होम, पश्चिम कचहरी मार्ग पर एचडीएफसी बैंक, बच्चा पार्क स्टार प्लाजा के बाहर, बच्चा पार्क स्थित सिटी सेंटर के बाहर, ईव्ज अस्पताल के बाहर, एम. प्रकाश नर्सिंग होम के बाहर, आनंद अस्पताल के बाहर, शहर के खैरनगर आदि पुराने बाजार।
ये तो उदाहरण हैं
अवैध पार्किंग की ये जगह तो महज उदाहरण हैं। शहर में इसी प्रकार 150 से अधिक संस्थानों के बाहर सड़क पर ही अवैध वाहन पार्किंग चल रही हैं। जहां पर जनता से वसूली हो रही है। लेकिन निगम के खजाने में एक भी रुपया यहां से नहीं पहुंच रहा है।