- अंतिम संस्कार के लिए जान जोखिम में डालने को मजबूर हुए ग्रामीण
संवाद न्यूज एजेंसी
खरखौदा। क्षेत्र के गांव पांची में श्मशान तक जाने वाले रास्ते की समस्या फिर सामने आ गई है। गांव निवासी 30 वर्षीय तरुण त्यागी की गाजियाबाद में हृदय गति रुकने से मौत हो गई। परिजन शव लेकर गांव पहुंचे तो श्मशान तक पहुंचने के लिए कोई रास्ता उपलब्ध नहीं था। ऐसे में ग्रामीणों को शव यात्रा लेकर मेरठ-खुर्जा रेलवे ट्रैक से गुजरना पड़ा। रेलवे लाइन से गुजरती शव यात्रा का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।
ग्रामीणों के अनुसार श्मशान तक जाने वाले करीब 300 मीटर लंबे रास्ते पर वर्षों से अवैध कब्जा था। इसके चलते ग्रामीण शव यात्रा और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए रेलवे लाइन के बराबर में पड़ी रेलवे की जमीन का उपयोग करते थे। करीब एक वर्ष पहले रेलवे ने अपनी जमीन को कब्जामुक्त कराते हुए वहां से आवागमन पूरी तरह बंद कर दिया। इसके बाद श्मशान तक पहुंचने की समस्या और गंभीर हो गई।
बाद में ग्रामीणों की सुविधा के लिए राजस्व विभाग ने रास्ते को कब्जा मुक्त कराया। इसके बाद जिला पंचायत द्वारा करीब 250 मीटर लंबे रास्ते का निर्माण कराया गया, लेकिन श्मशान तक पहुंचने के लिए करीब 50 मीटर का हिस्सा अधूरा रह गया। इस बीच क्षेत्र में हुई मूसलाधार बारिश के कारण बना हुआ करीब ढाई सौ मीटर रास्ता भी तालाब में बह गया और आवागमन रुक गया।
ग्रामीणों का कहना है कि अंतिम संस्कार जैसे संवेदनशील अवसर पर भी उन्हें रेलवे ट्रैक का सहारा लेना पड़ा। उनका कहना है कि यह कोई विकल्प नहीं बल्कि परिस्थितियों से उपजी मजबूरी थी। क्षेत्र में लगातार हुई बारिश और रास्ते के बह जाने से श्मशान तक पहुंचने का कोई दूसरा मार्ग उपलब्ध नहीं बचा था।
जिला पंचायत सदस्य गोपाल प्रधान का कहना है कि बारिश के कारण रास्ते को नुकसान हुआ है। जल्द इस्टीमेट बनाकर 250 मीटर रास्ते को दोबारा बनाया जाएगा। साथ ही 50 मीटर रास्ते का भी जल्द निर्माण कराया जाएगा।
खरखौदा - गांव पांची में शमशान घाट को जाने वाला टूटा पड़ा रास्ता। स्रोत (संवाद)