राहुल का रोड शो मेरठ में शिथिल पड़ी कांग्रेस के लिए संजीवनी जैसा रहा। मेरठ में आपसी कलह, कम जन समर्थन से जूझ रही कांग्रेस के शोमैन राहुल गांधी बृहस्पतिवार को यहां सड़क पर उतरे तो उम्मीद से ज्यादा जनसमर्थन नजर आया। जन सैलाब तो नहीं उमड़ा पर जो भीड़ आई वह कांग्रेसियों के चेहरे खिलाने के लिए काफी थी। इससे यह साफ हो गया कि भले ही भीड़ को वोट में बदलने को लेकर सभी दलों पर सवाल हो, लेकिन कांग्रेस को इस चुनाव में कमतर आंकना दूसरे दलों के लिए भूल साबित हो सकती है।
उत्तर प्रदेश एक और विधानसभा चुनाव की दहलीज पर खड़ा है। इसे लेकर तमाम दलों ने अपनी ताक झोेंक दी है। रैलियों और रोड शो का दौर चल पड़ा है। बृहस्पतिवार को राहुल गांधी ने मेरठ में रोड शो किया तो वह शिथिल पड़ी कांग्रेस के लिए संजीवनी सरीखा नजर आया। सर्किट हाउस से ईव्ज चौराहा, इंदिरा चौक, छतरी वाले पीर और उसके बाद घंटाघर पर लोगों के उत्साह ने यह बात साफ कर दी कि कांग्रेस का जलवा अभी एक दम धूमिल नहीं हुआ है। इसी का नतीजा रहा कि घंटाघर पर राहुल का संबोधन हुआ।
इससे पहले छतरी वाले पीर पर भी राहुल ने चादर चढ़ाई। रोड शो घंटाघर पहुंचा तो यहां कांग्रेस नेता यूसुफ कुरैशी पहले से मोर्चा संभाले हुए थे। लोगों का उत्साह देखकर यहां राहुल ने जनता से सीधा संवाद भी किया। लगे हाथ राज बब्बर और शीला दीक्षित ने भी लोगों में उत्साह भरा। इसे कांग्रेस का जलवा मानें या राहुल गांधी का, रोड शो का अहम पहलू यह रहा कि लोग उत्साहित नजर आए। छतों से लोगों ने जमकर राहुल का उत्साहवर्धन किया। यह जलवा यदि चुनाव में भी तारी हो गया तो फिर चुनावी पटकथा में कांग्रेस भी अहम रोल अदा कर सकती है।
कमतर तो नहीं कह सकते
पिछले विधानसभा चुनाव की बात करें तो गर्दिश के दिनों में भी कांग्रेस ने यहां कई सीटों पर अच्छा प्रदर्शन किया था। रालोद के साथ मिलकर कांग्रेस ने चुनावी रण में हुंकार भरी थी। मेरठ कैंट सीट से कांग्रेस उम्मीदवार रमेश धींगड़ा को 44 हजार से ज्यादा वोट मिले थे। शहर सीट पर भी यूसुफ कुरैशी को 31 हजार तो सिवालखास पर कांग्रेस समर्थित रालोद प्रत्याशी यशवीर सिंह को 55 हजार से ज्यादा वोट मिले थे। हस्तिनापुर से कांग्रेस उम्मीदवार गोपाल काली 39 हजार वोटों का आंकड़ा पार कर गए थे।
सरधना सीट पर रालोद से चुनावी मैदान में उतरे याकूब कुरैशी को भी 50 हजार से ज्यादा वोट मिले थे। आसपास के जिलों में भी कांग्रेस ने कई सीटों पर बेहतर प्रदर्शन किया था। ये वोट उस दौर में मिले, जब साइकिल जमकर चली थी। इस बार कांग्रेस पूरी ताकत लगाए हुए है और सभी की निगाहें गठबंधन पर हैं। सपा और बसपा पर रोड शो में निशाना न साधना, गठबंधन की भी चर्चा खड़ी कर रहा है। माना जा रहा है कि दोनों में से किसी के साथ भी कांग्रेस का गठबंधन हो गया तो निश्चित रूप से पार्टी बेहतर प्रदर्शन करेगी। यही वजह है कि राहुल का यह रोड शो कांग्रेसियों को सुखद अहसास करा गया।