रालोद प्रदेश अध्यक्ष का पद खाली होते ही इसे हथियाने की दौड़ शुरू हो चुकी है। वरिष्ठ नेता पद पर काबिज होने के लिए हाईकमान के यहां दस्तक देने के साथ ही अपने पक्ष में सिफारिश कराने लगे हैं।
पूर्वी उत्तर प्रदेश के दो नेताओं के साथ ही वेस्ट के भी दो वरिष्ठ नेता दौड़ में शामिल हैं। विधानसभा चुनाव 2017 को देखते हुए हाईकमान जल्दबाजी में कोई कदम उठाने के मूड में नहीं है।
पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से बातचीत और सियासी नफे नुकसान के बाद ही प्रदेश अध्यक्ष पर फैसला लिया जाएगा। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व सिंचाई मंत्री रहे मुन्ना सिंह चौहान का गत 31 जुलाई को निधन हो गया था।
चौहान पार्टी के तेज तर्रार और जुझारू छवि के नेता माने जाते थे। उनके न केवल पार्टी नेताओं से बल्कि विपक्षी नेताओं के साथ भी मधुर संबंध थे। उनके निधन से पार्टी को झटका लगा है।
विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाना जरूरी है। इसके लिए भागदौड़ भी शुरू हो गई है। अध्यक्ष पद की दौड़ में प्रदेश उपाध्यक्ष एवं पूर्व विधायक ठाकुर शिवकरण सिंह का नाम सबसे ऊपर है।
शिवकरण सिंह की गिनती पार्टी के तेजतर्रार एवं कुशल नेताओं में मानी जाती है। अगर पार्टी मुस्लिमों को साधने का दांव खेलती है तो पार्टी के पास सबसे बड़ा नाम राष्ट्रीय महासचिव डॉ. मसूद अहमद का है।
जाट बिरादरी से अध्यक्ष बनाए जाने की स्थिति में वेस्ट यूपी से पूर्व एमएलसी चौधरी जगत सिंह पर भी दांव खेला जा सकता है। जगत सिंह इससे पूर्व वेस्ट यूपी अध्यक्ष और प्रदेश उपाध्यक्ष रह चुके हैं।
इसके अलावा पूर्व विधायक एवं पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव राजेंद्र शर्मा भी पद के दावेदार हैं। शर्मा इससे पहले भी पार्टी के वेस्ट यूपी अध्यक्ष रह चुके हैं। सूत्रों के मुताबिक 12 अगस्त को चौहान की आरष्टि के बाद प्रदेश अध्यक्ष पर फैसला लिया जा सकता है।