फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

देखा नहीं जहान पर हौसला कर रहा हैरान, CDO ने किया सम्मानित

Fri, 09 Mar 2018 06:05 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, सचिन त्यागी, मेरठ
विज्ञापन
रितिका और रिदा - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

मेरठ में यूं तो मेधावी बच्चों का सम्मान आम बात है। लेकिन अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर विकास भवन में जब सात साल की दृष्टिहीन रितिका को सीडीओ ने सम्मानित किया तो सभागार तालियों से गूंज उठा। यह सम्मान रितिका को उसके जज्बे और आसमां छूने की जिद के लिए मिला। बीते चार साल से जागृति विहार के ब्रजमोहन स्कूल फॉर द ब्लाइंड में पढ़ रही रितिका ने अंधेरों से निकलकर अपनी जिंदगी का उजाला तलाश लिया है। आज उसे न सिर्फ गीता के कई श्लोक कंठस्थ हैं, बल्कि वह कथक की भी शानदार प्रस्तुति देती है।

विज्ञापन


संभल के एक छोटे से गांव राया खुर्द में जन्मी रितिका जन्म से ही दृष्टिहीन है। उसके पिता मदन सिंह ने बताया कि छह बच्चों में रितिका तीसरे नंबर की है। उसके जन्म के बाद जब पता चला कि वह देख नहीं सकती है तो बहुत दुख हुआ था। रिश्तेदार और आसपास के लोग तरह-तरह की बातें करते थे। लेकिन बीते चार सालों में उसकी जिंदगी ही बदल गई। बृहस्पतिवार को रितिका की मां भागेश को जब पता चला कि उनकी बेटी को अफसरों ने सम्मानित किया है तो वे भावुक हो गईं। उन्होंने फोन पर बताया कि बचपन से रितिका को लेकर वह परेशान रहती थीं, लेकिन अब लगता है कि हमारी बेटी हमारा नाम रौशन करेगी।

पढ़ें : International women's day: इन बेटियों पर देश को गर्व है, देखिए तस्वीरें

विज्ञापन
विज्ञापन

यहां रितिका जैसे कई हैं मेधावी

यह कहानी अकेली रितिका की नहीं है। ब्लाइंड स्कूल में पढ़ने वाली रिदा को भी गीता के चार श्लोक कंठस्थ हैं। उसकी प्रतिभा के लिए प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उसे सम्मानित किया था। रिदा के साथ ज्योति, ब्यूटी और जीशान कत्थक में इलाहाबाद प्रयाग संगीत समिति से छह साल का कोर्स कर रहे हैं। 

इनके भी हैं बड़े-बड़े सपने 
यहां पढ़ने वाली मुजफ्फरनगर की ज्योति ने बताया कि वह अलका यागनिक की फैन है। वह भी सिंगर बनना चाहती है। वहीं बिहार निवासी छात्रा ज्योति ने बताया कि वह कत्थक सीख रही है। आगे चलकर दूसरे बच्चों को भी सिखाना है। ऐसा नहीं ये बच्चे दुनिया से अलग-थलग हैं। आम बच्चों की तरह इनके लोकप्रिय क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर हैं। 

29 छात्र ले रहे शिक्षा 
इस ब्लाइंड स्कूल में उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और दूसरे राज्यों की पांच लड़कियां और 24 लड़के पढ़ते हैं। यहां आने से पहले ये दूसरों पर निर्भर थे। लेकिन अब ये अपने काम खुद ही निपटाते हैं। 

चैरिटी से चलता है 
प्रधानाचार्य प्रवीण शर्मा पत्नी उपासना के साथ स्कूल चलाते हैं। यहां बच्चों को निशुल्क शिक्षा दी जाती है। चैरिटी से स्कूल चलता है। प्रवीण शर्मा के बेटे वैभव शर्मा कंप्यूटर सिखाते हैं और मैना दास कत्थक सिखाती हैं।

शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें'

https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें