हस्तिनापुर। पर्यूषण महापर्व में बुधवार को कस्बे के दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर में चल रहे इंद्रध्वज महामंडल विधान में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। इस अवसर पर संयम, तप, त्याग आदि के माध्यम से जीवन जीने का संकल्प लिया गया।
कार्यक्रम में शांतिधारा का सौभाग्य राजेंद्र जैन, सुमन जैन, सम्यक जैन, राजुल जैन, शावी जैन, को प्राप्त हुआ। इसमें सहयोग प्रमोद जैन, विजय कुमार जैन एवं प्रवीण जैन ने किया। नित्य नियम पूजन के पश्चात शांतिनाथ, मल्लिनाथ सोलहकारण पूजन किया गया। इंद्रध्वज विधान में 24 तीर्थंकरों का पूजन करते हुए विधान के मांडले पर अर्घ्य समर्पित किए गए।
आचार्य ज्ञान भूषण महाराज रत्नाकर ने उत्तम तप धर्म के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि तप से ही क्रोध, मान, माया, लोभ, द्वैष जैसे कर्मों के दुष्प्रभाव कम होते हैं। इस तप को देवता भी तरसते हैं। तप से ही बुरे कर्माें का क्षय होता है। क्षेत्रीय अध्यक्ष जीवेंद्र जैन ने कहा कि इच्छाओं को रोकना ही तप कहलाता है। तप के बारह भेद बताए गए हैं। इस दौरान संगीतमय महाआरती की गई। आभा जैन ने भक्ति एवं सांस्कृतिक प्रतियोगिता के आधार पर पुरस्कार प्रदान किए गए।
कार्यक्रम में महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र कुमार जैन, मंत्री राजेन्द्र कुमार जैन, विजय कुमार जैन सहित अन्य मौजूद रहे। इस अवसर पर महाप्रबंधक मुकेश जैन, उमेश जैन, कमल जैन, अतुल जैन आदि मौजूद रहे।