जम्मू-कश्मीर में लगातार हो रही पत्थरबाजी और बिगड़े हालात सुधारने के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय बड़ा रिसर्च वर्क कराने जा रहा है। कश्मीर की समस्या के हल के लिए आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक पहलुओं के अलावा द्विपक्षीय समझौता के महत्व आदि विषय पर शोध कार्य होगा। सरकार नॉर्थ ईस्ट में रिसर्च वर्क को बढ़ावा देकर उसके इनपुट का इस्तेमाल कर चुकी है। इसका सकारात्मक असर देखने को मिला। आईसीएसएसआर को जम्मू और कश्मीर पर शोध कराने के लिए बड़ा प्रोजेक्ट दिया गया है। आईसीएसएसआर ने आवेदन मांगे हैं।
पिछले एक साल से कश्मीर के हालात ठीक नहीं हैं। सेना को उपद्रवियों के गुस्से का लगातार सामना करना पड़ रहा है। पत्थरबाजी रुकने का नाम नहीं ले रही। महिलाएं और बच्चे पत्थरबाजी में शामिल हैं। सरकार कश्मीर की स्थिति को सुधारने के लिए रिसर्च का इनपुट लेगी। इसके लिए आईसीएसएसआर (इंडियन काउंसिल ऑफ सोशल साइंस रिसर्च) को बड़ा प्रोजेक्ट मिला है। सूत्रों के मुताबिक 50 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट दिया गया है। आईसीएसएसआर ने जम्मू कश्मीर और नॉर्थ ईस्ट रीजन में रिसर्च के लिए 17 मई तक प्रपोजल मांगे हैं। रिफ्यूजी, माइग्रेंट्स और विस्थापित लोगों का आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक स्टेट्स, महिलाओं की स्थिति, बच्चे, बुजुर्ग, कमजोर वर्ग, डेमोग्राफिक चेंज और आधुनिक शिक्षा आदि से जुडे़ टॉपिक पर रिसर्च वर्क होगा। आईसीएसएसआर के मेंबर सेक्रेटरी प्रो. वीके मल्होत्रा का कहना है जम्मू-कश्मीर को लेकर रिसर्च प्रपोजल आमंत्रित किए हैं। यह बड़ा और महत्वपूर्ण रिसर्च वर्क होगा। पॉलिसी डॉक्यूमेंट के तौर पर इसका इस्तेमाल किया जाएगा। नॉर्थ ईस्ट के राज्यों में नक्सलवाद प्रभावित इलाकों में सुधार के लिए आईसीएसएसआर रिसर्च करा चुका है। इसके लिए अलग से फंड की व्यवस्था थी। इस बार जम्मू कश्मीर पर फोकस किया गया है।