हस्तिनापुर। पांच जिलों में 2073 वर्ग किमी क्षेत्रफल में फैले अभयारण्य क्षेत्र से रेस्क्यू कर लाए जाने वाले वन्य जीवों की दहाड़ जल्द ही हस्तिनापुर के रेस्क्यू सेंटर में सुनाई देगी।
प्रदेश सरकार के निर्देश पर वन विभाग द्वारा हस्तिनापुर के वानिकी प्रशिक्षण केंद्र के समीप इस समय रेस्क्यू सेंटर का निर्माण चल रहा है। जल्द ही दूसरे फेज का निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा। यहां अभी तक वन्य जीवों के लिए प्राकृतिक अनुकूल पिंजरे बनकर तैयार हो गए हैं। इनमें तेंदुओं के अलावा भालू एवं बाघों को भी रखा जाएगा। करीब नौ हेक्टेयर भूमि में वन्यजीवों को हस्तिनापुर में सुरक्षित रखने के लिए साढ़े चार करोड़ रुपये की लागत से दूसरे फेज में वन्य जीव रेस्क्यू सेंटर का निर्माण कार्य इस समय युद्ध स्तर पर चल रहा है।
वन विभाग की ओर से दावा किया जा रहा है कि यहां रेस्क्यू सेंटर का कार्य जल्द ही पूरा किया जाएगा। वन्य जीव रेस्क्यू सेंटर का शिलान्यास मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा ऑनलाइन 10 जून, 2022 को किया गया था। पिछले दो साल से वन्य जीव रेस्क्यू सेंटर का कार्य चल रहा है।
डीएफओ राजेश कुमार ने बताया कि हस्तिनापुर में बनने वाला वन्य जीव रेस्क्यू सेंटर चार चरण में बनेगा। इसके पहले दो चरण काफी महत्वपूर्ण हैं, जो कि पूरे होने वाले हैं। वन्य जीव रेस्क्यू सेंटर के निर्माण के दूसरे चरण में संगरोध ब्लॉक, नाइट सेल के साथ बड़े बाड़े, पोस्टमॉर्टम कक्ष, जल आपूर्ति, आंतरिक सड़क, बिजली आपूर्ति स्टेशन आदि कार्य चल रहा है। (संवाद)
ये जानवर रखे जाएंगे
रेस्क्यू सेंटर में बाघ, तेंदुआ, चीतल, हिरण, बारहसिंघा, खरगोश, नीलगाय आदि जानवरों को रखने के लिए बाड़े बनाए जा रहे हैं। रेस्क्यू सेंटर में बाघ और चीते के साथ अन्य वन्यजीवों को जल्द ही पनाह मिलेगी।
18 बाड़ों में सुरक्षित रखे जाएंगे वन्य जीव
वन्य जीव रेस्क्यू सेंटर में बाघ एवं भालू समेत अन्य खतरनाक वन्य जीवों को रखने के लिए 18 इनक्लोजर बनाए गए हैं। रेस्क्यू सेंटर चार फेज में विकसित किया जाना है। इसके दो फेज पूरा होने वाले हैं। जहां डिप्टी रेंजर, पशु चिकित्सक समेत स्टाफ के लिए रूम बनाए गए हैं। रेस्क्यू कर ले जाए जाने वाले वन्यजीवों की नियमित फिटनेस की जांच होगी। पूरी तरह फिट मिलने के बाद जीवों को वन्य जीव अभयारण्यों के चुनिंदा रेंज में छोड़ा जाएगा।
दूसरे फेज का चल रहा कार्य
हस्तिनापुर में बनने वाले वन्य जीव रेस्क्यू सेंटर का करीब नौ हेक्टेयर क्षेत्रफल में चार फेज में निर्माण होना है। इसके दूसरे फेज का निर्माण कार्य चल रहा है। इसमें कई वन्य जीवों के रहवास बनाए जा चुके हैं। -राजेश कुमार, डीएफओ, मेरठ