दांव पर लगी पुराने दिग्गजों की प्रतिष्ठा, पूर्व प्रधानों को भी आश्वासन दे रहे दावेदार
हस्तिनापुर। ग्राम पंचायत चुनाव में पिछली बार के कई दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। 2015 के चुनाव में ग्राम प्रधान पद पर काबिज कई दिग्गज इस बार आरक्षण के चलते दौड़ से भले ही बाहर हो गए हैं लेकिन सीट पर दबदबा बनाए रखने के लिए उन्होंने अपने चहेतों को मैदान में उतार दिया है। चहेतों को पूरे समर्थन का वादा भी किया जा रहा है। पूर्व प्रधान नए दावेदारों से यह भी वादा कर रहे हैं कि आरक्षण भले ही उनके हिसाब से निर्धारित न हुआ हो लेकिन के समर्थकों के वोट उन्हें ही मिलेंगे। दावेदार भी पूर्व प्रधान को आश्वासन दे रहे हैं कि भले ही हम जीतेंगे लेकिन काम आप ही करेंगे। मोहर भी आप के पास ही रहेगी। आप ही पंचायत के विकास कार्य तय करेंगे।
इस सबके बीच मतदाताओं की खातिरदारी भी धड़ल्ले से शुरू हो गई है। कोरोना संक्रमण के चलते ग्राम पंचायतों में वह रौनक नजर नहीं आ रही है, जो बीते चुनाव में रहती थी। फिलहाल सभी दावेदारों को नामांकन पत्र भरे जाने का इंतजार है।
दिन-रात घरों पर दस्तक दे रहे उम्मीदवार
सरूरपुर। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर क्षेत्र में चुनावी रणभेरी बज चुकी है। अपनी जीत के दावों को पक्का करने के लिए उम्मीदवारों ने हथकंडे अपनाने आरंभ कर दिए हैं।
गांवों में भावी उम्मीदवार मतदाताओं के घरों पर दिन-रात दस्तक दे रहे हैं। क्षेत्र के जिला पंचायत सदस्य वार्ड 12, 13, 14, 15 में प्रत्याशी हर क्षेत्र में मतदाताओं के सामने खरा उतरने के लिए हरसंभव प्रयास में जुटे हैं। भावी प्रत्याशियों के परिवार की महिला व रिश्तेदार भी वार्ड सदस्य से लेकर जिला परिषद के सदस्य तक अपनी तरफ से एड़ी चोटी का जोर लगाए हुए हैं। दूसरी ओर मतदाताओं ने जैसे बिल्कुल चुप्पी साध रखी है। प्रत्याशी की हां में हां मिलाकर मतदाता कन्नी काटकर निकल रहे हैं।
ब्लॉक रोहटा व सरूरपुर के गांवों में प्रधान पद के भावी प्रत्याशी से ज्यादा उनके समर्थक कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाह रहे, जहां भी बन पड़ता है मौका निकालकर अपने उम्मीदवार के पक्ष में लोगों का झुकाव करने में अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं। चुनावी प्रचार के इस शोर-शराबे के बीच मतदाताओं की चुप्पी प्रत्याशियों के बीच सिरदर्द बनी हुई है।