अप्रैल माह आधा बीतने के बाद भी खेतों में अभी भी पेराई योग्य करीब डेढ़ करोड़ क्विंटल गन्ना बचा है। बड़े किसान जहां सेंटरों पर एडवांस गन्ना डालने में लगे हैं तो वहीं तौल बंद होने से छोटे किसान पर्ची के बाद भी गन्ना नहीं डाल पा रहे हैं। इस अफरातफरी के बीच गन्ना विभाग अफसरों का कहना है कि खेतों में खड़े अवशेष गन्ना लेने तक कोई भी मिल बंद नहीं होने दी जाएगी। यह स्थिति यूपी के मेरठ शहर की है।
अप्रैल के पहले सप्ताह तक हर पेराई सत्र का समापन हो जाता था, लेकिन पिछले दो पेराई सत्र से बढ़े गन्ना रकबा और उत्पादन के चलते मिले मई माह तक चलानी पड़ रही हैं। पिछले साल मोहिउद्दीनपुर शुगर मिल तो 15 जून तक चली थी। चालू पेराई सत्र में भी अप्रैल आधा बीत चुका है, लेकिन खेतों में हर तरफ गन्ना ही गन्ना नजर आ रहा है। पारा 40 डिग्री की तरफ बढ़ने लगा है और गन्ना छिलाई में लगे मजदूर गेहूं कटाई को जाने लगे हैं। ऐसे में किसानों को संपूर्ण गन्ना आपूर्ति नहीं होने का डर सताने लगा है। बड़े किसान पर्ची के इतर भी सेंटरों पर एडवांस गन्ना डालने में लगे हैं, ताकि किसी तरह खेत खाली हो जाए। इस क्रम में गन्ना सेंटर भरने से तौल लिपिक तौल बंद कर चले जाते हैं। इसके चलते उन किसानों का भी गन्ना नहीं तौला जा रहा जिनके पास पर्ची है। शासन ने संपूर्ण गन्ना खरीद होने तक कोई भी मिल बंद नहीं होने देने की बात कही है। इसके लिए गन्ना आयुक्त कार्यालय से नोडल अधिकारी भी तय कर दिए हैं जो खेतों में खड़े गन्ने की हर रोज रिपोर्ट लेंगे। उप गन्ना आयुक्त तमाम जिला गन्ना अधिकारियों से रिपोर्ट लेकर नोडल अधिकारियों को भेजेंगे।
मेरठ मंडल में डेढ़ करोड़ क्विंटल गन्ना बाकी
मेरठ मंडल में कराए गए सर्वे के मुताबिक अभी भी पेराई योग्य करीब डेढ़ करोड़ क्विंटल गन्ना बाकी है। सबसे ज्यादा गन्ना मलकपुर, दौराला, सिंभावली और मवाना मिल के पास बचा है। बुलंदशहर मिल के पास गन्ना खत्म हो चुका है और सकौती, मोहिउद्दीनपुर और अनूपशहर आदि मिलों के पास कम गन्ना बचा है। बचे गन्ने के अनुसार कुछ मिल तो अप्रैल के अंदर ही गन्ना पेर लेंगी, लेकिन कुछ मिलें मई फर्स्ट वीक तक गन्ना पेरेंगी।