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Meerut News: गुनाहों से तौबा करें और मुल्क में अमन बनाए रखें

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कोतवाली क्षेत्र में ​स्थित शाही जमा म​स्जिद में जुमे की नमाज अदा करते अकीदतमंद। .......... संवा - फोटो : संवाद
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मेरठ। अलविदा जुमे के मुकद्दस मौके पर शाही ईदगाह और शाही जामा मस्जिद के खतीब कारी शफीकुर्रहमान कासमी ने कहा कि सभी गुनाहों से तौबा करें और मुल्क में अमन बनाए रखें। उन्होंने मुसलमानों से आत्म-मंथन करने और देश की शांति के लिए हर संभव कुर्बानी देने का आह्वान किया। कहा कि रमजान का महीना खुदा की तरफ से एक अजीम नेमत है जो इंसानी जिंदगी को पाक-साफ करने आता है।
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उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि आज के दौर में हम रमजान की गरिमा को भूलते जा रहे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि हमारे नबी हजरत मुहम्मद इस महीने की तैयारी दो माह पहले ही शुरू कर देते थे लेकिन आज हम इस पवित्र माह में भी झूठ और गुनाहों से पूरी तरह परहेज नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह शख्स बदनसीब है जिसे रमजान जैसा महीना मिले और वह अपनी मगफिरत (माफी) न करा सके। हर मुसलमान को यह सोचना चाहिए कि क्या उसकी इबादत और परहेज इस काबिल है कि वह कयामत के दिन नजात का जरिया बन सके।
संवेदनशील दौर में संयम और अमन की अपील

मौजूदा हालातों पर चर्चा करते हुए खतीब ने कहा कि वक्त बेहद नाजुक और संवेदनशील है। समाज में कुछ फितना-परस्त लोग माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं ऐसे में मुसलमानों की जिम्मेदारी है कि वे सब्र, समझदारी और अमन का रास्ता अपनाएं। उन्होंने अपील की कि मेरठ और पूरे भारत का माहौल शांतिपूर्ण बनाए रखना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है और इसके लिए यदि कोई कुर्बानी भी देनी पड़े तो पीछे नहीं हटना चाहिए।
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प्रशासनिक गाइडलाइन और ईद की नमाज पर हिदायत

आगामी ईद-उल-फित्र के मद्देनजर कारी शफीक ने नमाजियों से अपील की कि सड़कों पर नमाज पढ़ने से पूरी तरह परहेज किया जाए। यदि किसी स्थान पर जगह भर जाए तो दूसरी जगह जाकर नमाज पढ़ें लेकिन सार्वजनिक व्यवस्था को बाधित न करें। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकार और प्रशासन की गाइडलाइन का पालन करना जरूरी है।
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