मेरठ। नगर निगम प्रशासन की लापरवाही के चलते महानगर की जनता जलभराव से जूझ रही है। इसकी वजह शहर के कई नाले टूटना तथा कई नए नालों का निर्माण नहीं होना है। अब बरसात में नाला निर्माण संभव नहीं है। ऐसी स्थिति में नगर निगम नाले बनवाने के लिए आगे आया है। उसके द्वारा आपातकालीन टेंडर प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
नगर निगम के खजाने में इस वर्ष के शुरू में 14वें वित्त आयोग के करोड़ों रुपये जमा थे। इसके बावजूद विकास कार्यों के प्रस्ताव बनाने और बैठक करने का निर्णय निगम अधिकारियों ने समय रहते नहीं लिया। जिसके परिणामस्वरूप लॉकडाउन होने के बाद 14वें वित्त आयोग की बैठक नहीं हो सकी। इसके बावजूद विकास कार्यों पर धनराशि खर्च की गई। तीन दिन पहले ही 14वें वित्त के खजाने से होने वाले कार्यों केप्रस्ताव बैठक करके पास किए गए। करीब साढे़ 14 करोड़ रुपये से शहर में 20 से अधिक नालों का निर्माण कराया जाना है। नगर निगम प्रशासन ने सीमित समय में प्रक्रिया पूरी करने का निर्णय लेते हुए नाला निर्माण के टेंडर निकाल दिए हैं। यह माना जा रहा है कि निगम प्रशासन अपनी कमी छिपाने के लिए नाला निर्माण की टेंडर प्रक्रिया में जुटा है। इसको लेकर नगर निगम प्रशासन की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं।