हस्तिनापुर। कस्बे के प्राचीन बड़े मंदिर में चल रहे 40 दिवसीय श्री शांतिनाथ विधान के नौंवे दिन मुख्य मंदिर में सभी श्रद्धालुओं ने मिलकर भगवान का अभिषेक किया। मुनि भाव भूषण महाराज ने अपने प्रवचनों में कहा कि धर्म ही मनुष्य को जीवन जीने की कला सिखाता है।
कार्यक्रम में शांतिधारा करने का सौभाग्य क्षेत्र के कोषाध्यक्ष राजेंद्र जैन, सुमन जैन, सम्यक जैन, राजुल जैन, सावी जैन को प्राप्त हुआ। भाव भूषण महाराज ने अपने प्रवचनों में कहा कि जन्म लेना और जीवन जीना दोनों में अंतर होता है। जन्म तो पशु-पक्षी भी लेते हैं, लेकिन जीवन जीने की कला मनुष्य को ही आती है। शांतिनाथ भगवान के सामने बनाए गए मांडले पर 130 परिवारों ने अर्घ्य व श्रीफल चढ़ाए। श्री शांतिनाथ महामंडल विधान में प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालुओं ने मंत्रोचार के साथ सभी क्रियाएं पूर्ण की। युवा विद्वान पं. आशीष जैन शास्त्री, आयुष जैन शास्त्री इस विधान को संपन्न करा रहे हैं। इस विधान में कमला जैन, महेंद्र चंद जैन, अनिल जैन, रीता जैन, बनारसी दास जैन, संजय जैन, सुमन जैन, राजुल जैन, सावी जैन आदि श्रद्धालुओं का तीर्थ क्षेत्र कमेटी द्वारा अभिनंदन किया गया। तीर्थ क्षेत्र के सदस्य व विधान संयोजक विजय कुमार जैन ने मंगल तिलक, माला पहनाकर स्वागत किया। सांयकालीन बेला में आरती के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम धार्मिक अंताक्षरी प्रतियोगिता हुई।
अध्यक्ष जीवेंद्र कुमार जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र कुमार जैन, प्रवीण कुमार जैन, राजीव जैन, रोहित जैन, जेसी जैन, शशांक जैन, अभय कुमार जैन, महाप्रबंधक मुकेश कुमार जैन आदि मौजूद रहे।