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धर्म जीवन जीने की कला है : शास्त्री

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सरधना। मोहल्ला छावनी में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में शामिल महिला श्रद्धालु। आयोजक
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विश्व भारती पब्लिक स्कूल में श्रीमद्भागवत कथा का चौथा दिन
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संवाद न्यूज एजेंसी
सरधना। विश्व भारती पब्लिक स्कूल मोहल्ला छावनी में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन कथा वाचक पंडित शिवम शास्त्री ने जीवन में धर्म के वास्तविक स्वरूप और उसकी अनिवार्यता पर संदेश दिए। उन्होंने वर्तमान सामाजिक परिवेश पर चिंता जताते हुए कहा कि आज दुखों का एक प्रमुख कारण बुजुर्गों की उपेक्षा है। धर्म को केवल पाने का साधन मान लिया गया है, जबकि धर्म जीवन जीने की कला है। जब तक धर्म जीवन का अंग नहीं बनता, विकारों से मुक्ति संभव नहीं।
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शास्त्री ने कहा कि आज धर्म केवल मंदिरों तक सीमित रह गया है, जबकि इसकी सबसे अधिक आवश्यकता हमारे घरों को है। जब घरों में अवज्ञा, लोभ, कपट, पाखंड, दंभ और ईर्ष्या जैसे दोष भरे हों, तो तीर्थ यात्राओं या मंदिरों में शांति कितनी देर टिकेगी। उन्होंने यह भी कहा कि कथा, कीर्तन और जागरण जैसे धार्मिक आयोजनों को आज संस्कार निर्माण के बजाय निजी स्वार्थ पूर्ति का माध्यम बना दिया गया है, जो खेदजनक है। कार्यक्रम में करुणा, विमला, सावित्री, नेहा, अनिता शर्मा, श्रद्धा, राजबाला, पायल, ज्योति, रिचा, राखी, बृजेश, सियानंद, राज नारायण, नरेंद्र पंडित शामिल रहे।
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