कंकरखेड़ा के जैन मंदिर में कैश लोचन हुआ। इस दौरान सैकड़ो की संख्या में भक्त मौजूद रहे
मेरठ। कंकरखेड़ा के दिगंबर जैन मंदिर में जैन मुनि अनुशासन सागर महाराज का सुबह नौ बजे केश लोचन हुआ। कार्यक्रम में बाल मुनि अनुकरण सागर महाराज ने प्रवचन में ध्यान का महत्व बताया। उन्होंने श्रावकों को बताया कि दिगंबर साधू के कर्तव्य और ध्यान मुख्य होते हैं। उन्होंने कहा कि नियमित ध्यान आत्मा का पवित्र रखता है।
उन्होंने कहा कि प्रभु का मनन करते हुए अपने आप के गुणों के स्मरण में ध्यान चलेगा तो यह श्रेष्ठ है। वस्तु विषयक परिचय चल रहा है तो वहां राग, द्वेष का प्रसंग नहीं होना चाहिए। ध्यान और अध्ययन मुख्य हैं। अगर ध्यान और अध्ययन नहीं है तो वह मुनि नहीं है। मुनि भेष में रहकर परिश्रम करना बेकार है। ध्यान तो आत्मा को पूरी तरह पवित्र रखता है। बाहरी विषयों में लगे रहे तो संसार से निवृत्त होने का लाभ नहीं मिल सकता है।
मुनि अनुकरण सागर ने कहा कि जीवन को सही दिशा में ले जाने के लिए अनुशासन, धैर्य और ध्यान के साथ संतुलन जरूरी है। यदि आचार, विहार और आहार के संयम के साथ चलेंगे तो स्वयं के साथ ही समाज और विश्व के कल्याण में भी हम सहायक हो सकेंगे। कार्यक्रम में विपिन जैन ने बताया कि मुनि 14 जनवरी तक मंदिर में विराजमान रहेंगे। इस दौरान डीके जैन, देवेंद्र जैन, नरेश जैन, पराग जैन, जयकुमार जैन, संदीप जैन सहित अन्य मौजूद रहे।