रजिस्ट्री विभाग सरकारी नीतियों के बीच फंस गया है। एक तरफ जहां शासन से हर साल राजस्व का लक्ष्य लगातार बढ़कर मिल रहा है तो प्रोपर्टी के बूम में आ रही गिरावट के कारण लक्ष्य पाना तो दूर पिछले साल के आंकड़े को भी विभाग छू नहीं पा रहा है। रजिस्ट्री विभाग 2012 से पहले तक जहां लक्ष्य से ज्यादा राजस्व की प्राप्ति करता रहा तो इसके बाद से लगातार ग्राफ नीचे गिरता गया। इस बार रजिस्ट्री विभाग लक्ष्य का मात्र 52 प्रतिशत ही छू पाया है।
विकास योजनाओं की उपेक्षा से गिर रहा ग्राफ
मेरठ में ऐसा कोई बड़ा प्रोजेक्ट अभी तक लांच नहीं हुआ है कि लोगों का रूझान मेरठ की तरफ बने। रजिस्ट्री विभाग के आंकड़े साफ बताते हैं कि इस साल जितना राजस्व प्राप्त हुआ है उसमें आवासीय रजिस्ट्री का हिस्सा मात्र 30 प्रतिशत है, बाकी रजिस्ट्री कृषि भूमि की हुई हैं।
आवासीय योजनाएं पूरी तरह फ्लाप
मेरठ में एमडीए और आवास एवं विकास परिषद दो विभाग आवासीय योजनाओें पर काम करते हैं। आवास एवं विकास परिषद ने पिछले पांच साल से कोई भी बड़ी आवासीय योजना लांच नहीं की है। एमडीए ने जो आवासीय योजनाएं लागू की वह विवादों के घेरे में फंस गयी। शताब्दीनगर में जहां दो हजार से ज्यादा आवंटी विवाद हल होने का इंतजार कर रहे हैं, तो गंगा नगर एक्टेंशन में भी यही हाल है। इसके अलावा लोहियानगर, वेदव्यासपुरी में भी मामले फंसे हुए हैं। यदि यहां के विवाद हल हो जाएं तो हजारों रजिस्ट्री होना तय है।
प्राइवेट बिल्डरों के प्रोजेक्ट भी धड़ाम
शहर के विकास के लिए सरकारों द्वारा कोई ऐसा प्रोजेक्ट नहीं आया, जिससे मेरठ के प्रति जनता का आकृर्षण बढ़े। हवाई अड्डा, मेट्रो, रेपिड़ रेल आदि तमाम प्रोजेक्ट आज भी सिर्फ कागजों में ही दौड़ रहे हैं। शहर से दूसरे शहरों की कनेक्टिविटी लगातार बिगड़ रही है। ऐसे में इन्वेस्टर हों या जरूरतमंद लोग मेरठ की आवासीय योजनाओं से दूर होते नजर आ रहे हैं।
ये है रजिस्ट्री विभाग का आंकड़ा
वित्तीय वर्ष राजस्व का लक्ष्य प्राप्त राजस्व प्रतिशत
2016-17 597.70 करोड़ 311.56 करोड़ 52.00
2015-16 569.20 करोड़ 371.64 करोड़ 65.20
2014-15 517.40 करोड़ 397.08 करोड़ 76.74