सरकारी जमीन पर तहसील सरधना में हुए खेल के मामले में डीएम ने कार्रवाई तय कर दी है। डीएम बी. चंद्रकला ने एसडीएम से पूरे मामले की रिपोर्ट मांगते हुए रजिस्ट्रार कानूनगों को जहां सस्पेंड करने की बात कही है। वहीं तत्कालीन एसडीएम सहित जो भी इस मामले में दोषी हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति करते हुए रिपोर्ट शासन को भेजने को कहा है।
ये था पूरा मामला
एनएच-58 पर ग्राम सिवाया के पास सरकारी पशु चारागाह की जमीन है। 30 करोड़ की करीब बीस हजार वर्ग मीटर इस जमीन पर बिल्डर ने कब्जा कर लिया। इसके बाद बिल्डर ने वर्ष 2013 में कॉलोनी का निर्माण शुरू किया। इस दौरान बिल्डर ने सरधना के तत्कालीन एसडीएम अखंड प्रताप सिंह से साज कर इस जमीन को अपने नाम करा लिया। जिसकी शिकायत होने पर तत्कालीन डीएम ने तुरंत अखंड प्रताप सिंह को एसडीएम पद से हटाते हुए अरविंद मिश्रा को एसडीएम नियुक्त किया। अरविंद मिश्रा ने पूर्व एसडीएम अखंड प्रताप सिंह के आदेश को खारिज कर दिया। जिसके विरोध में बिल्डर ने कमिश्नर के यहां अपील की, इस पर अपर आयुक्त गया प्रसाद ने सुनवाई करते हुए 27 अगस्त 2014 को अरविंद मिश्रा के आदेश को खारिज कर पूर्व एसडीएम अखंड प्रताप सिंह का आदेश बहाल कर दिया। लेकिन तहसील सरधना में यह आदेश दब कर रह गया। इस आदेश के खिलाफ न तो कोई रिव्यू दायर किया गया और न हीं हाईकोर्ट या रेवेन्यू बोर्ड में अपील की गई। इसके बाद 11 अगस्त 2016 को अचानक यह जमीन तत्कालीन एसडीएम कुमार भूपेंद्र सिंह ने खतौनी में बिल्डरों के नाम दर्ज कर दी।
अमर उजाला ने किया खुलासा
अमर उजाला ने 23 नवंबर के अंक में इस संबंध में प्रमुखता से खबर प्रकाशित की। जिस पर जिलाधिकारी बी. चंद्रकला ने एसडीएम सरधना राकेश कुमार से पूरे मामले में रिपोर्ट मांगी है। इस दौरान मौखिक रिपोर्ट के आधार पर ही बी. चंद्रकला ने एसडीएम सरधना को रजिस्ट्रार कानूनगो जिन्होंने इस जमीन को खतौनी पर दर्ज किया है, उनके सस्पेंड करने की संस्तुति करने का आदेश जारी किया है।
कई अधिकारियों पर गिर सकती है गाज
इस पूरे मामले में 2013 से अब तक जो एसडीएम और तहसीलदार रहे हैं, वह सभी जांच के दायरे में आ चुके हैं। प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो मामला बहुत बड़ा है। ऐसे में जिस एसडीएम ने शुरू में इस जमीन को बिल्डर के नाम कर विवादित बनाया, उसके खिलाफ और जिसने अब नाम चढ़ाया, उनके खिलाफ तो कार्रवाई निश्चित रूप से तय है। लेकिन इस बीच जो लोग अपर आयुक्त के आदेश को दो साल तक दबाकर बैठे रहे, उनके खिलाफ भी जांच के बाद विभागीय कार्रवाई की संस्तुति हो सकती है।
कई पर कार्रवाई के साथ रिव्यू होगा दाखिल
डीएम बी. चंद्रकला ने बताया कि इस पूरे प्रकरण में घोर अनियमितता और भ्रष्टाचार नजर आया है। ऐसे में रजिस्ट्रार कानूनगो को सस्पेंड किया जा रहा है। इसके साथ ही इस पूरे मामले में जो भी अधिकारी संलिप्त रहे हैं उनकी कार्रवाई की समीक्षा कर कार्रवाई तय की जा रही है और रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। इसके साथ ही इस मामले पर एक बार फिर कमिश्नर के यहां रिव्यू दाखिल किया जाएगा और शीघ्र इसके निस्तारण का अनुरोध भी किया जाएगा। क्योंकि जमीन वास्तव में नियम विरुद्ध तरीके से बिल्डर को दी गई है।