संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। कस्बे के प्राचीन बड़ा मंदिर में 40 दिवसीय श्री शांतिनाथ विधान के 15वें दिन बृहस्पतिवार को श्रद्धा और भक्ति के साथ धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुआ। विधान में करीब 100 परिवारों ने सहभागिता कर जिनेंद्र भगवान की आराधना की।
कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य वेदी पर विराजमान भगवान शांतिनाथ, कुंथुनाथ एवं अरहनाथ के अभिषेक से हुई। त्रिमूर्ति जिनालय में विधिविधान से श्री शांतिनाथ विधान का आयोजन किया गया। शांतिधारा ने कमलेश जैन, संभव जैन, विवेक जैन एवं आर्जव जैन, सुलोचना जैन ने की।
विधान के दौरान बाल ब्रह्मचारिणी सुनीता दीदी ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि द्वितीय वलय में चार प्रकार की आराधना और बारह भावनाओं का चिंतन कराया गया है। उन्होंने कहा कि दर्शन, ज्ञान, चरित्र और तप की आराधना ही आत्मशुद्धि का आधार है। मनुष्य तन, धन, यौवन, प्रतिष्ठा और भौतिक संपदा नश्वर हैं, जबकि आत्मा अविनाशी है। अनित्य भाव का चिंतन कर जीव को आत्मकल्याण के मार्ग पर अग्रसर होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि संसार की सभी वस्तुएं क्षणभंगुर हैं, इसलिए व्यक्ति को नित्य और शाश्वत आत्मस्वरूप की ओर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। अनुष्ठान की मंगल क्रियाएं पंडित आशीष जैन शास्त्री ने संपन्न कराईं। प्रश्नमंच और धार्मिक अंताक्षरी प्रतियोगिता आकर्षण का केंद्र रहीं। विजेताओं को सीमा जैन एवं संजय जैन की ओर से पुरस्कृत किया गया।
प्राचीन दिगंबर जैन बड़े मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद