जिन स्टाफ नर्स की संविदा समाप्त की गई है, उनका कहना है कि उन्हें नियुक्ति देने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। वह तहरीर दे चुकी है। मेरठ की एक महिला के माध्यम से उन्हें ऑफर लेटर दिए गए थे। तब बताया गया था कि ऑफर लेटर सही है, इसके बाद उन्हें नियुक्ति दी गई है। ऐसे में सबकी जांच होनी चाहिए। ऐसे में जिले के कई कर्मचारियों पर भी जांच की आंच है। सवाल है कि आखिर किस आधार पर स्टाफ नर्स को नियुक्ति दी गई।
झांसी में तैनात हैं डॉ सुषमा चंद्रा
भर्ती प्रक्रिया जिले में तैनात रही निवर्तमान सीएमओ डॉ. सुषमा चंद्रा के कार्यकाल में हुई है। डॉ. चंद्रा इन दिनों झांसी में मेडिकल ऑफिसर है।
इन स्टाफ नर्स के खिलाफ मुकदमा
मेरठ के चिंदौड़ी निवासी इंदु रानी, मेरठ निवासी अनीता कुमारी, बागपत के बोढ़ा निवासी वंदना, बागपत निवासी अलका, अमरोहा के डिडौली निवासी ताहिरा बानो और मेरठ निवासी अंजू के खिलाफ तहरीर दी गई हैं। स्टाफ नर्स बड़ौत, छपरौली, बिनौली, पिलाना और खेकड़ा में तैनात थी। इससे पहले 28 नवंबर को चिरचिटा गांव की राखी, मुजफ्फरनगर के बिटावदा की साक्षी, मेरठ की वंदना, गाजियाबाद के पतला की रेणु, डौलचा की उर्मिला, मेरठ के सरधना की मोहिनी भारद्वाज, मेरठ के चौबला की अर्चना कुमारी, मेरठ के टीपी नगर की कविता की संविदा समाप्त कर दी गई है। सीएचसी बिनौली, बागपत, पिलाना, छपरौली और खेकड़ा में तैनात थी और इनके खिलाफ मुकदमा दर्ज हो चुका है।
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