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सवालों के घेरे में दस हजार संविदा कर्मचारियों की भर्ती, जांच में फंस सकते हैं कई कर्मचारी

Sun, 15 Dec 2019 12:32 AM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत
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सीएमओ डॉ. जितेंद्र कुमार वर्मा - फोटो : अमर उजाला
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राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की ओर से की गई 10 हजार से अधिक संविदा कर्मचारियों की भर्ती सवालों के घेरे में आ गई है। दिसंबर 2018 में निकाली गई इन भर्तियों में लगातार फर्जी लेटर पर नियुक्ति के मामले सामने आ रहे हैं। बागपत जिले में अब तक फर्जी ऑफर लेटर से भर्ती हुई 14 स्टाफ नर्स की संविदा समाप्त की जा चुकी है। करीब 70 अन्य नियुक्तियों की भी जांच चल रही है। 

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एनएचएम की भर्ती प्रक्रिया में सेंधमारी कर स्टाफ नर्स के पदों पर फर्जी लेटर पर नियुक्ति कर दी गई। जिले में अब तक की जांच में 14 मामले सामने आ चुके हैं। दिसंबर 2018 में निकाली गई भर्ती में विभिन्न पदों पर प्रदेश में 10 हजार कर्मचारी रखे गए थे। सीएमओ डॉ. जितेंद्र वर्मा का कहना है कि शासन को मामले की जानकारी दे दी गई है। अब तक जिस तरह के मामले सामने आए हैं, उससे अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति भी जांच के दायरे में है। बागपत जिले में अन्य नियुक्तियों की भी जांच कराई जा रही है। जिले में अब 70 से अधिक कर्मचारियों की जांच कराई जाएगी। इनका नवंबर माह का वेतन रोक दिया गया है। जिन कर्मचारियों की नियुक्ति की पुष्टि हो जाएगी, उन्हें ही वेतन दिया जाएगा।

एसआईटी की जांच से खुल सकता है खेल
भर्ती प्रक्रिया में सेंधमारी कर फर्जी ऑफर लेटर के आधार पर नियुक्ति पाने का खेल बागपत में सामने आ चुका है। अन्य जिलों में भी इसी तरीके से भर्ती होने की आशंका है। सीएमओ डॉ. जितेंद्र वर्मा का कहना है कि विभागीय जांच लखनऊ से होगी। लेकिन एसआईटी की जांच पुलिस की संस्तुति के बाद होगी है।

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जांच में फंस सकते हैं कई कर्मचारी

जिन स्टाफ नर्स की संविदा समाप्त की गई है, उनका कहना है कि उन्हें नियुक्ति देने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। वह तहरीर दे चुकी है। मेरठ की एक महिला के माध्यम से उन्हें ऑफर लेटर दिए गए थे। तब बताया गया था कि ऑफर लेटर सही है, इसके बाद उन्हें नियुक्ति दी गई है। ऐसे में सबकी जांच होनी चाहिए। ऐसे में जिले के कई कर्मचारियों पर भी जांच की आंच है। सवाल है कि आखिर किस आधार पर स्टाफ नर्स को नियुक्ति दी गई।

झांसी में तैनात हैं डॉ सुषमा चंद्रा
भर्ती प्रक्रिया जिले में तैनात रही निवर्तमान सीएमओ डॉ. सुषमा चंद्रा के कार्यकाल में हुई है। डॉ. चंद्रा इन दिनों झांसी में मेडिकल ऑफिसर है।

इन स्टाफ नर्स के खिलाफ मुकदमा
मेरठ के चिंदौड़ी निवासी इंदु रानी, मेरठ निवासी अनीता कुमारी, बागपत के बोढ़ा निवासी वंदना, बागपत निवासी अलका, अमरोहा के डिडौली निवासी ताहिरा बानो और मेरठ निवासी अंजू के खिलाफ तहरीर दी गई हैं। स्टाफ नर्स बड़ौत, छपरौली, बिनौली, पिलाना और खेकड़ा में तैनात थी। इससे पहले 28 नवंबर को चिरचिटा गांव की राखी, मुजफ्फरनगर के बिटावदा की साक्षी, मेरठ की वंदना, गाजियाबाद के पतला की रेणु, डौलचा की उर्मिला, मेरठ के सरधना की मोहिनी भारद्वाज, मेरठ के चौबला की अर्चना कुमारी, मेरठ के टीपी नगर की कविता की संविदा समाप्त कर दी गई है। सीएचसी बिनौली, बागपत, पिलाना, छपरौली और खेकड़ा में तैनात थी और इनके खिलाफ मुकदमा दर्ज हो चुका है।

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