खाद्य सुरक्षा कानून के तहत सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों से मिलने वाला राशन लोगों को नहीं मिल रहा। जनपद में चयनित साढ़े चार लाख पत्र परिवार राशन के लिए भटक रहे हैं।
एजेंसियों पर सूची में नाम होने को लेकर हंगामे हो रहे हैं तो कहीं राशन कार्ड में नाम गलत और परिवार के सदस्यों की संख्या कम दर्ज होने के कारण लोग परेशान हैं। शहर से देहात तक राशन मिलने की व्यवस्था पटरी से उतरी हुई है। शिकायत के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो रहा है। जिला प्रशासन भी गंभीर नजर नहीं आ रहा है।
प्रदेश में एक जनवरी से खाद्य सुरक्षा अधिकार अधिनियम लागू हो गया है। पांच जनवरी से राशन की दुकानों पर गेहूं, चावल, मिटटी का तेल आदि का वितरण किया जाना था, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा। डीएम जिले में विधिवत राशन वितरण की बात कह रहे हैं, लेकिन हकीकत यही है कि 90 प्रतिशत राशन कार्डों में गलतियों की भरमार है।
राशन कार्ड से कुछ के नाम गायब है तो कुछ को पात्रता सूची से बाहर रखा गया है। एजेंसियों पर चस्पा की गई सूची में पिता और पति के नाम गलत दर्ज है। इसे लेकर आए दिन राशन एजेंसियों पर लोग हंगामा कर रहे हैं। एजेंसी संचालकों का कहना है कि गलतियों की भरमार के कारण ही राशन वितरित नहीं हो पा रहा है।
8 लाख में से रह गए 4.5 लाख
पूर्व में जनपद में लगभग 8 लाख परिवारों को राशन मिलता था, लेकिन अब खाद्य सुरक्षा अधिकार अधिनियम के तहत जनपद के 459027 लाख परिवारों को ही सस्ते राशन मिलने वालों की सूची में शामिल किया गया है। प्रशासन स्तर पर चयनित पात्र परिवारों के 2094637 लाख सदस्य शामिल हैं। लेकिन इन्हें भी राशन के लिए भटकना पड़ रहा है।
5 से 20 तारीख तक बंटेगा राशन
जिला प्रशासन के रिकार्ड के अनुसार शहर और देहात में प्रत्येक माह की 5 से 20 तारीख तक सभी सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों से राशन वितरित किया जाना है। 23 तारीख तक राशन डीलर को वितरण प्रमाण पत्र संबंधित सतर्कता समिति से सत्यापित कराना होगा। ताकि अंतिम अवशेष स्टॉक को विभागीय वेबसाइट पर संबंधित कार्यालय द्वारा फीड किया जा सके।
ये है खाद्य सुरक्षा अधिनियम में पात्र
अंतोदय परिवार, बीपीएल परिवार, भिक्षावृत्ति, घरेलू कामकाम करने वाले, जूते चप्पल मरम्मत करने वाले, फेरी लगाने वाले, रिक्शा चालक, कुष्ठ रोगी, एड्स पीड़ित, अनाथ, स्वच्छकार, कुली, पल्लेदार, किन्नर आदि। आवासहीन परिवार, 30 वर्ग मी. क्षेत्रफल के कच्चे आवास वाले परिवार।