दिल्ली से मेरठ के बीच प्रस्तावित आरआरटीएस (रीजन रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) कॉरिडोर के इर्द गिर्द ऊंची-ऊंची इमारतें नजर आएंगी। दरअसल इस प्रोजेक्ट के लिए स्थानीय स्तर पर भी पैसा जुटाना है। जिसके लिए फ्लोर एरिया रेश्यो (एफएआर) बढ़ाने की कवायद शुरू हो गई है। विभागीय सूत्रों की मानें तो मेरठ में पांच गुना तक एफएआर बढ़ सकता है। इसके बढ़ने से यहां ऊंची इमारतें बनाई जा सकेंगी।
रैपिड ट्रेन की उम्मीदें अब तेजी से आकार ले रही हैं। शासन स्तर पर बैठकें हो चुकी हैं। सरकार साफ कह चुकी है कि जनवरी 2018 यानी छह माह में रैपिड ट्रेन पर काम शुरू हो जाएगा। मंडलायुक्त डॉ. प्रभात ने भी बैठक कर सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे अपनी-अपनी जिम्मेदारियों के हिसाब से इस प्लान पर काम करें।
पैसे की सबकी अपनी-अपनी हिस्सेदारी
एनसीआरटीसी जो प्लान इसके लिए पेश कर चुकी है, उसके मुताबिक परियोजना में करीब 32 हजार करोड़ रुपये का कैपेक्स (कैपिटल एक्सपेन्डीचर) आएगा। इसमें सबकी अलग-अलग हिस्सेदारी है। कुल रकम का 20 प्रतिशत राज्य सरकार तथा 20 प्रतिशत केंद्र सरकार वहन करेगी। बाकी 60 प्रतिशत राशि का ऋण लिया जाएगा। ऋण एडीबी या अन्य वित्तीय संस्थानों से लिया जाएगा। ऋण की सर्विसिंग व रिपेयर एनसीआरटीसी करेगा। उत्तर प्रदेश सरकार को 4306 करोड़ रुपये, दिल्ली सरकार को 861 करोड़ रुपये व केंद्र सरकार को 5165 करोड़ रुपये का वित्तीय भार इस प्रोजेक्ट पर वहन करना होगा।
पैसा जुटाने की मशक्कत शुरू
प्रदेश सरकार ने रकम का इंतजाम करने की मशक्कत शुरू कर दी है। मुख्य रूप से चार बिंदुओं पर काम हो रहा है जिससे आय होगी। अतिरिक्त विकास या अति सुदृढ़ीकरण चार्ज से भी आय में इजाफा किया जाएगा। ट्रांजिट ओरियेंटिड डेवलपमेंट पर ट्रांजैक्शन सेस व अतिरिक्त स्टांप ड्यूटी लगाने पर कितना राजस्व प्राप्त होगा तथा उससे परियोजना की क्या मदद हो सकेगी, इसका अनुमान निकाला जाएगा तथा इसकी आख्या प्रमुख सचिव को भेजी जाएगी। इसके अतिरिक्त एफएआर बढ़ाया जाएगा ताकि आय भी बढ़ सके।
यह है एफएआर
फ्लोर एरिया रेश्यो फिलहाल निजी कॉलोनियों के लिए 1.5 गुना तथा सरकारी भवनों के लिए 2.5 गुना नियत है। यानी यदि एक हजार वर्ग मीटर भूखंड है तो उस पर निजी बिल्डर एक हजार गुना 1.5 यानी 1500 मीटर निर्माण और कर सकता है। एक हजार वर्ग मीटर भूतल, एक हजार मीटर प्रथम तल और बाकी पांच सौ मीटर द्वितीय तल पर निर्माण हो सकता है। अब कहा जा रहा है कि सरकार रैपिड के लिए पांच गुना तक एफएआर करने की बात कह रही है। यानी इसका एकदम दोगुना या इससे भी ज्यादा। ऐसे में इमारतों की ऊंचाई बढ़ती जाएगी।
शुल्क भी बढ़ेगा
एफएआर बढ़ेगा तो बिल्डर इसका शुल्क भी ज्यादा ही जमा करेंगे। इससे आय में काफी वृद्धि होगी। इस बाबत सभी विभागों को पत्र भी लिखा जा चुका है कि इस कॉरिडोर के आसपास कोई निर्माण या प्रोजेक्ट बिना अनुमति के शुरू न किया जाए।
नोएडा की तर्ज पर होगा विकास
मेरठ। नोएडा की बात करें तो वहां अलग-अलग एफएआर है। औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण वहां 3.5 तक एफएआर गया है। उधर, मेट्रो एलाइनमेंट के पास एफएआर चार तक जा रहा है। मेरठ में रैपिड ट्रेन आ रही है तो यहां भी यही स्थिति होगी। पांच एफएआर का प्लान बन रहा है। यदि चार भी हुआ तो भी नोएडा सरीखी बहुमंजिला इमारतें यहां बनाई जा सकेंगी। अहम बात यह है कि दिल्ली से एनएच-58 पर ट्रेन मेरठ से आ रही है। मुख्य रूप से मोदीनगर, मुरादनगर और आसपास इस तरह की इमारतों के विकसित होेने की संभावनाएं हैं।