Meerut News: रैपिड रेल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों, उद्यमियों, कर्मचारियों समेत कई समूहों से सफर करते हुए बात की। पीएम ने उनसे पूछा कि रैपिड के चलने से आपको क्या लाभ होगा। सबने अपने-अपने नजरिये से लाभ बताए।
PM Modi Meerut Visit: रैपिड और मेट्रो को हरी झंडी देकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शताब्दीनगर से साउथ स्टेशन तक 8 मिनट का सफर किया। इसमें स्कूली बच्चे, एमबीबीएस छात्र, उद्यमी, विशेष बच्चे और एनसीआरटीसी में निर्माण कार्य करने वाले कर्मचारियों के साथ सफर करते हुए मोदी ने उनका अनुभव जाना।
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प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति से सम्मानित 12 साल की बाल पर्यावरणविद् बच्ची ईहा दीक्षित ने प्रधानमंत्री से कहा कि आपने ने तो सूफी संत हजरत निजामुद्दीन औलिया की उस कहावत को ही बदल दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि दिल्ली अभी दूर है। यह सुनते ही मोदी हंसने लगे। ईहा सेंट फ्रांसिस वर्ल्ड स्कूल में आठवीं की छात्रा है।
विशेष बच्चे ने प्रधानमंत्री को अपनी खुद से बनाई हुईं तस्वीरें दिखाईं। सरदार वल्लभभाई पटेल मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस छात्र से प्रधानमंत्री ने पूछा कि रैपिड से आपको क्या लाभ मिलेगा। इस पर एक छात्र ने बताया कि वह गाजियाबाद का निवासी है, रोजाना टैक्सी से 800 रुपये किराया लगता है और आने-जाने में ढाई से तीन घंटे का समय लगता है। अब रैपिड में पैसा कम लगेगा और समय की बचत होगी।
तीसरे समूह में एनसीआरटीसी में निर्माण करने वाले कर्मचारी थे। मोदी ने उनसे पूछा है कि आपका क्या अनुभव रहा। इस पर उन्होंने जवाब दिया कि यातायात सुलभ होने के साथ अब रोजगार के भी अवसर मिलेंगे।
चौथा समूह उद्यमियों का था। मोदी ने पूछा कि रैपिड से उद्यमियों को क्या लाभ मिलेगा। इस पर उद्यमियों ने बताया कि उनकी कंपनी में पहले 15 कर्मचारी काम करते थे व अब हाईवे बनने के बाद 150 कर्मचारी काम करते हैं। रैपिड का संचालन होने से कंपनी में 1500 कर्मचारी काम करेंगे। रैपिड के संचालन होने पर दूरदराज के व्यापारी मेरठ में आने लगेंगे। विकास को पंख लग जाएंगे।
पांचवें समूह में छात्र-छात्राएं थे। मोदी ने उनसे पूछा कि छात्र-छात्राओं को रैपिड का क्या फायदा होगा। 12 साल की छात्रा ईहा दीक्षित को प्रधानमंत्री ने पहचान लिया। बोले कि ईहा बेटा आप तो बड़े हो गए। रैपिड के बारे में कुछ बताओ। ईहा ने कहा है कि सूफी संत हजरत निजामुद्दीन औलिया की कहावत थी कि दिल्ली अभी दूर है, आपने तो उनकी कहावत को ही बदल दिया। ईहा ने बताया कि वह लगातार पौधे लगा रही हैं।
बता दें कि सूफी संत हजरत निजामुद्दीन औलिया ने दिल्ली के सुल्तान ग्यासुद्दीन तुगलक के संदर्भ में यह बात कही थी, जो कहावत बन गई। यह कहावत 14वीं सदी में तब लोकप्रिय हुई जब सुल्तान बंगाल से दिल्ली लौटते समय औलिया को धमका रहा था, लेकिन वह दिल्ली कभी पहुंच नहीं सका और रास्ते में ही मारा गया। यह मूल कवाहत फारसी में है हुनूज दिल्ली दूर अस्त (दिल्ली अभी दूर है)। इसका मतलब होता है कि मंजिल अभी दूर है या काम अभी बाकी है।